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मैं जिसे चाँद न मिलावां51एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अस्पताल की दीवारें भी रोईं

अस्पताल की दीवारें भी रोईं होंगी उस दिन। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे सीन्स देखकर लगता है जैसे हर चीज़ में जान आ गई हो। दादी माँ का रोना, डॉक्टर की गंभीरता, नर्स का सहारा — सब कुछ दिल को छू गया।

वो पल जब समय थम गया

जब दादी माँ ने अपनी पोती को देखा और रो पड़ीं, तो लगता है जैसे समय थम गया हो। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे इमोशनल पल बहुत कम देखे हैं। हर आँसू में एक कहानी, हर सांस में एक दर्द — सब कुछ दिल को छू गया।

खामोशी में छिपी चीख

कमरे में खामोशी थी, लेकिन हर सांस में चीख थी। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे सीन्स देखकर लगता है जैसे हर शख्स अपने दर्द में डूबा हो। दादी माँ का रोना, डॉक्टर की गंभीरता, नर्स का सहारा — सब कुछ दिल को छू गया।

वो खामोशी जो चीख रही थी

कमरे में सन्नाटा था, लेकिन हर सांस में दर्द था। मैं जिसे चाँद न मिला के इस सीन में बिना डायलॉग के भी इतना इमोशन कैसे आ गया? दादी माँ का रोना, डॉक्टर की गंभीरता, और वो बेचैन नज़रें — सब कुछ दिल को छू गया।

दादी माँ का प्यार अटूट

उम्र ढल गई, लेकिन प्यार नहीं ढला। मैं जिसे चाँद न मिला में दादी माँ का वो रोना देखकर लगता है जैसे वो अपनी जान दे दें अपनी पोती के लिए। ऐसे रिश्ते आजकल कहाँ मिलते हैं? दिल से निकला हुआ प्यार सच में अमर होता है।

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