लड़का वहाँ खड़ा है लेकिन कुछ बोल नहीं रहा। उसकी आँखों में बेचैनी साफ दिख रही है। वह अपनी माँ और बहन के बीच फँसा हुआ है। मैं जिसे चाँद न मिला की कहानी में यह किरदार बहुत जटिल लगता है। क्या वह सच जानता है? या वह बस चुप रहकर सबको खुश करना चाहता है? उसकी चुप्पी ही सबसे बड़ा सबूत है कि घर में कुछ गड़बड़ है।
वह लड़की जिसके माथे पर पट्टी लगी है, उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान है। यह मुस्कान दर्द की नहीं, बल्कि जीत की लग रही है। उसने माँ का भरोसा जीत लिया है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे धोखेबाज किरदारों को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। वह जानती है कि कैसे खेलना है। उसकी यह चालाकी आगे की कहानी में बड़ा धमाका कर सकती है।
जब कहानी पार्क में शिफ्ट होती है, तो माहौल एकदम बदल जाता है। वह लड़की अकेली है और तभी कुछ गुंडे आ जाते हैं। यह डर का माहौल बहुत अच्छे से बनाया गया है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे सस्पेंस फुल मोड़ बहुत पसंद आते हैं। लड़की की बेचैनी और गुंडों की धमकी ने सीन को बहुत तनावपूर्ण बना दिया। अब आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है।
अचानक एक काले मास्क वाला लड़का आता है। उसका लुक बहुत मिस्टीरियस है। वह लड़की को बचाने आया है या कुछ और? मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे रहस्यमयी किरदार हमेशा कहानी को नया मोड़ देते हैं। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक है। क्या वह उस लड़के का ही दूसरा रूप है? यह सवाल दिमाग में घूम रहा है।
लड़की को अचानक बचपन की याद आती है जब एक छोटे लड़के के हाथ पर खून का निशान था। यह फ्लैशबैक बहुत महत्वपूर्ण लगता है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे पुराने राज़ धीरे-धीरे खुलते हैं। शायद यह निशान और आज की मारपीट आपस में जुड़े हुए हैं। यह याद उसे ताकत दे रही है या डरा रही है, यह तो आगे ही पता चलेगा।