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मैं जिसे चाँद न मिलावां8एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सीढ़ियों से गिरने का डरावना पल

जब वह लड़की सीढ़ियों से गिरती है, तो पूरा माहौल तनाव से भर जाता है। उसकी चीख और दूसरों की घबराहट देखकर दिल दहल जाता है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे ड्रामेटिक सीन्स बहुत प्रभावशाली लगते हैं। उसका सिर टकराना और खून बहना देखकर लगता है कि कहानी अब और भी उलझने वाली है। सबकी प्रतिक्रियाएं बहुत असली लगती हैं।

नीली साड़ी वाली महिला का गुस्सा

नीली साड़ी पहनी महिला का गुस्सा देखकर लगता है कि वह किसी बड़े रहस्य को छिपा रही है। जब वह फोन पर बात करती है, तो उसकी आवाज में एक अजीब सी बेचैनी है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे किरदार बहुत दिलचस्प लगते हैं जो बाहर से शांत लेकिन अंदर से तूफान होते हैं। उसकी आँखों में डर और गुस्सा दोनों साफ दिख रहे हैं।

सफेद बॉक्सों का रहस्य

दो नौकरानियाँ जब सफेद बॉक्स लेकर चलती हैं, तो लगता है कि इनमें कुछ कीमती या खतरनाक चीजें हैं। उनकी बातचीत और चेहरे के भाव देखकर लगता है कि वे कुछ छिपा रही हैं। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे छोटे-छोटे विवरण कहानी को और भी रोचक बना देते हैं। जब वह लड़की इन बॉक्सों के पास आती है, तो माहौल और भी तनावपूर्ण हो जाता है।

बालों में काले रिबन वाली लड़की का दर्द

जब वह लड़की जिसके बालों में काले रिबन हैं, सिर पर हाथ रखकर दर्द से कराहती है, तो दिल को छू लेता है। उसकी आँखों में आँसू और चेहरे पर दर्द साफ दिख रहा है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे भावनात्मक पल बहुत प्रभावशाली लगते हैं। उसका गिरना और फिर उठने की कोशिश करना देखकर लगता है कि वह बहुत मजबूत है, लेकिन इस वक्त टूट गई है।

हरे जैकेट वाली लड़की की हैरानी

हरे जैकेट पहनी लड़की का चेहरा जब वह सब कुछ देखती है, तो हैरानी और डर से भर जाता है। वह कुछ बोलना चाहती है लेकिन शब्द नहीं निकल रहे। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे पल बहुत अच्छे लगते हैं जहाँ किरदार बिना बोले अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं। उसकी आँखें सब कुछ कह रही हैं - शॉक, डर, और शायद थोड़ी सी ईर्ष्या भी।

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