व्हीलचेयर पर बैठी लड़की के चेहरे पर जो ठंडक है, वह किसी बड़े बदले की योजना बता रही है। वह जानबूझकर सबको देख रही है ताकि उनका डर महसूस कर सके। मैं जिसे चाँद न मिला में उसका यह रवैया बताता है कि वह सिर्फ शिकार नहीं, बल्कि शिकारी बन चुकी है। उसकी हर हरकत अब कैलकुलेटेड लग रही है।
जब लड़का गुस्से में चिल्लाता है और उंगली दिखाता है, तो लगता है कि अब पर्दा उठने वाला है। उसकी आवाज में जो कंपन है, वह गुस्से और दुख का मिश्रण है। मैं जिसे चाँद न मिला में उसका यह किरदार सबसे ज्यादा कन्फ्यूजिंग है। क्या वह व्हीलचेयर वाली के खिलाफ है या उसके साथ? उसका स्टैंड क्लियर नहीं हो रहा है।
यह सीन किसी कहानी के अंत जैसा नहीं, बल्कि एक नई लड़ाई की शुरुआत लग रहा है। सबके चेहरे पर अलग-अलग भाव हैं। मैं जिसे चाँद न मिला की यह क्लाइमेक्स बहुत ही दमदार है। खून, आंसू, गुस्सा और साजिश, सब कुछ एक साथ मिलकर एक तूफान खड़ा कर रहा है। अब आगे क्या होगा, यह जानने की बेचैनी बढ़ गई है।
काले कोट वाले लड़के का गुस्सा देखकर लगता है कि वह सब कुछ जान गया है। उसने कागज फाड़कर जो किया, वह सही था या गलत, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन उसकी आँखों में जो दर्द है, वह साफ दिख रहा है। मैं जिसे चाँद न मिला की कहानी में जब वह उंगली उठाकर चिल्लाता है, तो लगता है कि अब सब कुछ बदलने वाला है। उसका हर एक्शन अब बहुत मायने रखता है।
बिस्तर पर लेटी लड़की की हालत देखकर दिल पसीज जाता है। उसके मुंह से खून निकलना और नर्स का भागना यह साबित करता है कि मामला गंभीर है। मैं जिसे चाँद न मिला में इस तरह के इमोशनल सीन देखकर आंसू रोकना मुश्किल हो जाता है। वह बेचारी क्या सोच रही होगी जब सब उसे छोड़कर जा रहे थे? उसकी मासूमियत और दर्द इस सीन की जान है।