बच्चों वाला सीन देखकर मन बहुत भारी हो गया। उस छोटे लड़के का गुस्सा और फिर उसकी चोट, सब कुछ बहुत वास्तविक लगा। बड़ी होकर वही लड़का जब उस लड़की को बचाने की कोशिश करता है, तो लगता है कि बचपन का वो वादा अभी भी जिंदा है। मैं जिसे चाँद न मिला की कहानी में ये छोटे-छोटे बारीकियां बहुत मायने रखते हैं। हर कलाकार ने अपने किरदार को बहुत खूबसूरती से निभाया है।
पूल के किनारे खड़ी उस लड़की की मुस्कान और पानी में डूबती हुई लड़की की चीखें, ये विरोधाभास बहुत तेज है। लगता है जैसे एक तरफ दुनिया हंस रही हो और दूसरी तरफ कोई मर रहा हो। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे दृश्य हैं जो आपको सोचने पर मजबूर कर देते हैं। उस लड़के का चेहरा जब वह पानी में कूदता है, तो उसमें एक अजीब सी बेचैनी थी जो बहुत प्रभावशाली लगी।
वीडियो में इस्तेमाल किए गए रंग बहुत ही खूबसूरत हैं। पीले और हरे रंग के कपड़े पहने किरदार और नीले पानी की संगति आंखों को सुकून देता है, लेकिन कहानी का दर्द इसे और भी गहरा बना देता है। मैं जिसे चाँद न मिला की दृश्य कथाकथन बहुत ही लाजवाब है। खासकर वो सीन जब लड़की पानी के नीचे तैर रही होती है, तो रोशनी का खेल कमाल का लग रहा था।
क्या वह लड़का उसे बचाने के लिए कूदा या यह सब एक नाटक था? यह सवाल पूरे वीडियो में दिमाग में चलता रहता है। उसकी आंखों में जो उलझन था, वह साफ दिख रहा था। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे मोड़ हैं जो आपको अंत तक बांधे रखते हैं। उस बच्चे का लॉलीपॉप वाला सीन भी बहुत मायने रखता है, शायद यही उसकी मासूमियत का प्रतीक था जो बाद में खो गई।
पीछे खड़ा वह आदमी जो काले चश्मे में है, वह सब कुछ देख रहा है लेकिन कुछ नहीं कर रहा। यह उसकी मजबूरी है या कोई बड़ी साजिश? मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे किरदार हैं जो कहानी को और भी रहस्यमयी बना देते हैं। पानी के नीचे का दृश्य जब लड़की की आंखें बंद होती हैं, तो लगता है जैसे उसने सब कुछ छोड़ दिया हो। बहुत ही भावनात्मक दृश्य था।