दादी के हाथों में खाना लेकर मुस्कुराते हुए आना और फिर नीरजा का गीला होकर ऊपर आना—यह विरोधाभास दिल को छू गया। लगता है घर में कुछ गड़बड़ है। ऊपर खड़े लोग उसे घूर रहे हैं, जैसे वह कोई अपराधी हो। मैं जिसे चाँद न मिला की कहानी में यह तनाव बहुत गहरी है।
तीन लोग बालकनी में खड़े हैं—एक लड़का हरे जैकेट में, दो लड़कियां। नीचे नीरजा गीली खड़ी है, जैसे कोई सजा पा रही हो। उनकी नज़रें एक-दूसरे से टकरा रही हैं। मैं जिसे चाँद न मिला में यह दृश्य बहुत भावनात्मक है। लगता है नीरजा पर कोई झूठा इल्जाम लगा है।
नीरजा की आंखें पूछ रही हैं—'मैंने क्या किया?' वह कांप रही है, भीगी हुई, अकेली। ऊपर वाले चुप हैं, लेकिन उनकी चुप्पी शोर मचा रही है। मैं जिसे चाँद न मिला में यह दृश्य देखकर मैं भी रो पड़ी। कितना अन्याय हो रहा है इस लड़की के साथ।
वह लड़का नीरजा की तरफ इशारा कर रहा है, जैसे उसे दोषी ठहरा रहा हो। उसकी आंखों में गुस्सा है, लेकिन पीछे छिपा दर्द भी दिख रहा है। मैं जिसे चाँद न मिला में यह किरदार बहुत जटिल है। क्या वह नीरजा से प्यार करता है या नफरत?
वह लड़की पीली पोशाक में खड़ी है, मुस्कुरा रही है, लेकिन उसकी आंखों में चालाकी है। वह नीरजा को नीचे देखकर खुश लग रही है। मैं जिसे चाँद न मिला में यह किरदार खलनायक लगती है। क्या उसने नीरजा को फंसाया है?