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मैं जिसे चाँद न मिलावां7एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

दादी का प्यार और नीरजा का संघर्ष

दादी के हाथों में खाना लेकर मुस्कुराते हुए आना और फिर नीरजा का गीला होकर ऊपर आना—यह विरोधाभास दिल को छू गया। लगता है घर में कुछ गड़बड़ है। ऊपर खड़े लोग उसे घूर रहे हैं, जैसे वह कोई अपराधी हो। मैं जिसे चाँद न मिला की कहानी में यह तनाव बहुत गहरी है।

ऊपर वाले बालकनी का रहस्य

तीन लोग बालकनी में खड़े हैं—एक लड़का हरे जैकेट में, दो लड़कियां। नीचे नीरजा गीली खड़ी है, जैसे कोई सजा पा रही हो। उनकी नज़रें एक-दूसरे से टकरा रही हैं। मैं जिसे चाँद न मिला में यह दृश्य बहुत भावनात्मक है। लगता है नीरजा पर कोई झूठा इल्जाम लगा है।

नीरजा की आंखों में सवाल

नीरजा की आंखें पूछ रही हैं—'मैंने क्या किया?' वह कांप रही है, भीगी हुई, अकेली। ऊपर वाले चुप हैं, लेकिन उनकी चुप्पी शोर मचा रही है। मैं जिसे चाँद न मिला में यह दृश्य देखकर मैं भी रो पड़ी। कितना अन्याय हो रहा है इस लड़की के साथ।

हरे जैकेट वाले लड़के का गुस्सा

वह लड़का नीरजा की तरफ इशारा कर रहा है, जैसे उसे दोषी ठहरा रहा हो। उसकी आंखों में गुस्सा है, लेकिन पीछे छिपा दर्द भी दिख रहा है। मैं जिसे चाँद न मिला में यह किरदार बहुत जटिल है। क्या वह नीरजा से प्यार करता है या नफरत?

पीली ड्रेस वाली लड़की की चालाकी

वह लड़की पीली पोशाक में खड़ी है, मुस्कुरा रही है, लेकिन उसकी आंखों में चालाकी है। वह नीरजा को नीचे देखकर खुश लग रही है। मैं जिसे चाँद न मिला में यह किरदार खलनायक लगती है। क्या उसने नीरजा को फंसाया है?

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