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मैं जिसे चाँद न मिलावां54एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सूट और शाल का कनेक्शन

काले सूट वाले शख्स की गंभीरता और शाल ओढ़ी लड़की की मासूमियत के बीच का तनाव कमाल का है। लगता है जैसे दोनों के बीच कोई अनकही बात हो जो हवा में तैर रही हो। 'मैं जिसे चाँद न मिला' की कहानियां हमेशा ऐसे ही मोड़ पर आकर दिलचस्प हो जाती हैं। चश्मे वाले शख्स का एंट्री भी रहस्यमयी लग रहा है, शायद वह किसी बड़े ट्विस्ट की चाबी हो।

चुप्पी का शोर

कभी-कभी शब्दों से ज्यादा असरदार खामोशी होती है, और यह वीडियो उसी का सबूत है। सभी किरदारों के चेहरे पर एक अजीब सी बेचैनी है। भूरे कपड़ों वाली महिला का रोना और काले सूट वाले का ठहराव, सब कुछ बहुत गहरा है। 'मैं जिसे चाँद न मिला' में ऐसे सीन देखकर लगता है कि हर किसी के पास कोई न कोई राज है जो बाहर आने को बेताब है।

आंसुओं की कीमत

भूरे स्वेटर वाली महिला के आंसू देखकर दिल पसीज जाता है। लगता है जैसे उसने बहुत कुछ सहन किया हो। चश्मे वाले शख्स का उसके कंधे पर हाथ रखना एक सहारे जैसा लग रहा है। 'मैं जिसे चाँद न मिला' जैसे शो में रिश्तों की ये बारीकियां ही असली जान होती हैं। हर फ्रेम में एक नया सवाल खड़ा हो जाता है कि आखिर हुआ क्या है?

रहस्यमयी मुलाकात

यह मुलाकात साधारण नहीं लग रही है। काले सूट वाला शख्स और शाल वाली लड़की एक-दूसरे को ऐसे देख रहे हैं जैसे सालों बाद मिले हों, या फिर कोई बड़ी गलती हो गई हो। 'मैं जिसे चाँद न मिला' की पटकथा हमेशा ऐसे ही मोड़ पर आकर दर्शकों को हैरान कर देती है। पीछे खड़ा चश्मे वाला शख्स भी इस पहेली का अहम हिस्सा लग रहा है।

फैशन और फीलिंग्स

किरदारों के कपड़े और उनके भाव दोनों ही बहुत गहराई से चुने गए हैं। काले सूट की एलिगेंस और भूरे स्वेटर की सादगी के बीच का कंट्रास्ट बहुत अच्छा लग रहा है। 'मैं जिसे चाँद न मिला' में विजुअल स्टोरीटेलिंग पर खासा ध्यान दिया जाता है। हर एक्सेसरी, हर लुक कुछ न कुछ संकेत दे रहा है कि कहानी आगे क्या मोड़ ले सकती है।

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