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मैं जिसे चाँद न मिलावां57एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अस्पताल की चुप्पी

अस्पताल में सब कुछ शांत है, लेकिन हवा में एक अजीब सी चुप्पी है। शायद कोई बड़ी घटना होने वाली है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे माहौल बहुत अच्छे से बनाए जाते हैं। हर कोई इंतज़ार कर रहा है।

काले कोट वाले की चिंता

वह आदमी जो काले कोट में है, उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी है। शायद वह किसी का इंतज़ार कर रहा है या फिर कोई बुरी खबर सुनने वाला है। मैं जिसे चाँद न मिला की कहानी में ऐसे पल बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।

महिला की मुस्कान के पीछे

भूरे रंग के सूट वाली महिला की मुस्कान के पीछे कुछ छिपा है। शायद वह जानती है कि आगे क्या होने वाला है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे किरदार बहुत रहस्यमयी होते हैं। उसकी आँखों में एक चमक है जो सब कुछ बता रही है।

नर्सों की चुप्पी

पीछे खड़ी नर्सें कुछ बोल नहीं रही हैं, लेकिन उनकी आँखें सब कुछ देख रही हैं। शायद वे जानती हैं कि यह डॉक्टर और महिला के बीच क्या चल रहा है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे छोटे किरदार भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।

गलियारे का माहौल

अस्पताल का गलियारा बहुत शांत है, लेकिन हवा में तनाव है। शायद कोई बड़ी घटना होने वाली है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे माहौल बहुत अच्छे से बनाए जाते हैं। हर कोई इंतज़ार कर रहा है कि आगे क्या होगा।

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