जब अस्पताल के सीन से नदी किनारे के सीन में ट्रांजिशन हुआ तो लगा जैसे समय थम गया हो। वो दो महिलाएं और उनका प्यारा संवाद देखकर लगा कि मैं जिसे चाँद न मिला में हर पल की अपनी अहमियत है। फिर वापस अस्पताल आकर वो गुस्सा और तनाव देखकर दिल दहल गया।
दादी का वो गुस्सा और आंसू देखकर लगा कि शायद वो लड़का उनका पोता है और उसने कोई बहुत बड़ी गलती की है। लेकिन जब नदी किनारे वाली यादें आईं तो समझ आया कि ये गुस्सा नहीं बल्कि एक टूटा हुआ दिल है। मैं जिसे चाँद न मिला में हर किरदार के पास एक कहानी है।
उस लड़के की चुप्पी और दादी का गुस्सा देखकर लगा कि शब्दों की जरूरत ही नहीं है। सब कुछ आँखों से कह दिया गया। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे सीन्स हैं जो दिल को छू लेते हैं। नदी किनारे वाली यादें और अस्पताल का दर्द सब कुछ एक दूसरे से जुड़ा हुआ लग रहा है।
नदी किनारे बैठी वो दो महिलाएं और उनका प्यारा संवाद देखकर मन शांत हो गया। फिर अचानक अस्पताल का सीन आया तो रोंगटे खड़े हो गए। दादी का वो गुस्सा किसी बात पर नहीं बल्कि किसी गहरे दर्द पर था। मैं जिसे चाँद न मिला की कहानी में ये फ्लैशबैक बहुत मायने रखते हैं।
जब वो चमकदार जैकेट पहने लड़का अस्पताल के कमरे में घुसा तो माहौल में एक अजीब सी तनावपूर्ण खामोशी छा गई। बूढ़ी दादी का गुस्सा और आंसू देखकर दिल पसीज गया। लगता है मैं जिसे चाँद न मिला में कोई बहुत बड़ा राज़ खुलने वाला है। उस लड़के की आँखों में डर और पछतावा साफ़ दिख रहा था।