जैसे ही वो सूट पहने आदमी अंदर आता है, वातावरण बदल जाता है। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक है, जैसे वो कुछ छुपा रहा हो। मैं जिसे चाँद न मिला की कहानी में ऐसे मोड़ ही सबसे ज्यादा रोचक लगते हैं। हर किरदार के बीच का सामंजस्य बहुत गहरा है।
उस महिला के चेहरे पर जो भावनाएं हैं, वो शब्दों में बयां नहीं की जा सकतीं। वो नाराज भी लग रही है और दुखी भी। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे जटिल भावनाओं को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। हर दृश्य में एक नई कहानी छुपी है।
वो लड़की जो शुरू में चुपचाप खड़ी थी, अब उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान है। लगता है वो कुछ जानती है जो बाकी नहीं जानते। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे सूक्ष्म पल ही सबसे ज्यादा दिलचस्प लगते हैं। हर भाव-भंगिमा में एक राज छुपा है।
जब दादी अपनी पोती के पेट की तरफ इशारा करती हैं, तो लगता है जैसे वो किसी बड़े रहस्य को उजागर करने वाली हों। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे नाटकीय पल ही सबसे ज्यादा दिलचस्प लगते हैं। हर किरदार के बीच का तनाव बहुत गहरा है।
उस आदमी की आंखों में जो दर्द और गुस्सा है, वो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। लगता है वो किसी बड़े धोखे का शिकार हुआ है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे भावनात्मक परतें ही सबसे ज्यादा पसंद आते हैं। हर दृश्य में एक नई कहानी छुपी है।