हरी जैकेट वाली महिला का व्यवहार एक माँ जैसा था, जो अपने बेटे को समझाने की कोशिश कर रही थी। मैं जिसे चाँद न मिला में रिश्तों की ये बारीकियाँ बहुत अच्छी लगती हैं। उसने लड़के के कंधे पर हाथ रखकर उसे सांत्वना दी, जो एक माँ का ही काम है।
दो बच्चों का खेलना और लड़के के घुटने पर चोट का निशान देखकर लगा जैसे बचपन की कोई याद ताज़ा हो गई। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे छोटे-छोटे पल बड़े मायने रखते हैं। लड़की ने उसे सहारा दिया, जो दोस्ती की सबसे खूबसूरत मिसाल है।
डॉक्टर साहब का आना और लड़की से बात करना दिखाता है कि वो उसकी सेहत को लेकर कितने गंभीर हैं। मैं जिसे चाँद न मिला में हर किरदार की अपनी एक अहमियत है। उनकी बातचीत से लगा कि लड़की की हालत गंभीर हो सकती है।
लड़के और लड़की के बीच बिना कुछ कहे भी एक गहरा संवाद हो रहा था। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे पल सबसे ज्यादा प्रभावशाली लगते हैं। उनकी आँखें सब कुछ कह रही थीं, जो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
अस्पताल के कमरे में परिवार का हर सदस्य अपनी जगह से लड़की का सहारा बन रहा था। मैं जिसे चाँद न मिला में परिवार के बंधन को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। हर कोई अपनी चिंता और प्यार व्यक्त कर रहा था।