भूरे रंग के स्वेटर वाली महिला की आँखों में जो डर था, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। जब उस लड़के ने उसे सहारा दिया और कमरे की ओर ले गया, तो लगा जैसे पूरी दुनिया थम गई हो। नर्स का शांत रहना और इन दोनों का घबराया हुआ चेहरा, यह कंट्रास्ट बहुत गहरा था। मैं जिसे चाँद न मिला की कहानी में यह मोड़ बहुत अहम साबित होगा।
नर्स का व्यवहार बहुत प्रोफेशनल था, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। जैसे वो जानती हो कि आगे क्या होने वाला है। जब उसने फाइल बंद की और उन दोनों को देखा, तो माहौल में सन्नाटा छा गया। यह साइलेंस शोर से ज्यादा डरावना था। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे छोटे-छोटे डिटेल ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। अगला सीन क्या होगा, यह जानने की बेचैनी बढ़ रही है।
जैसे ही वो दोनों हॉस्पिटल रूम में दाखिल हुए, माहौल बदल गया। खाली बिस्तर और फिर अचानक सामने आया वो चेहरा, यह ट्विस्ट उम्मीद से परे था। लड़के का रिएक्शन देखकर लगा कि उसे पहले से कुछ पता था या फिर यह झटका उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा। माँ का सहमा हुआ चेहरा दिल को छू गया। मैं जिसे चाँद न मिला में इमोशनल ड्रामा अपने चरम पर है।
उस लड़के की नीली जैकेट और सफेद पैंट उसकी घबराहट के बीच भी स्टाइलिश लग रही थी। लेकिन उसकी आँखों में जो बेचैनी थी, वो किसी फैशन से बड़ी थी। जब उसने माँ को संभाला और आगे बढ़ा, तो लगा जैसे वो अकेला ही इस तूफान से लड़ रहा हो। नर्स के साथ उसकी बहस और फिर कमरे की ओर भागना, यह सब बहुत तेज रफ्तार में हुआ। मैं जिसे चाँद न मिला का यह एपिसोड दिल धड़का देने वाला है।
आखिरकार वो पल आ ही गया जब पर्दा उठा। बिस्तर पर लेटी लड़की ने जैसे ही आँखें खोलीं, सबकी सांसें थम गईं। उसका हैरान होना और उन दोनों का सदमे में होना, यह ट्रैंगल बहुत दिलचस्प होने वाला है। क्या यह कोई पुरानी जान-पहचान है या कोई नया रिश्ता? सवालों की झड़ी लग गई है। मैं जिसे चाँद न मिला में यह क्लाइमेक्स बहुत शानदार तरीके से सेट किया गया है।