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मैं जिसे चाँद न मिलावां43एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

डॉक्टर का आना और सच का खुलना

जब डॉक्टर ने वो फाइल दी, तो लगा जैसे सब कुछ बदल गया। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे मोड़ देखकर लगता है कि अब कहानी नई दिशा लेगी। उस प्रमाणपत्र ने सबके चेहरे बदल दिए, और कमरे में सन्नाटा छा गया।

बिस्तर पर बैठी लड़की की कहानी

उस लड़की की आंखों में जो डर था, वो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। जब वो उठी और पीछे हटी, तो लगा जैसे वो किसी से भाग रही हो। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे सीन देखकर लगता है कि वो किसी बड़े राज का हिस्सा है।

दो बॉक्स और एक बड़ा राज

जब उस नर्स ने दो बॉक्स दिखाए, तो लगा जैसे कुछ गड़बड़ है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे सीन देखकर लगता है कि वो बॉक्स किसी बड़े राज की चाबी हैं। उसकी आंखों में डर था, और हाथों में वो बॉक्स।

कमरे का तनाव और सबकी चुप्पी

पूरा कमरा तनाव से भरा हुआ था। हर कोई कुछ कहना चाहता था, लेकिन कोई बोल नहीं रहा था। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे सीन देखकर लगता है कि अब कुछ बड़ा होने वाला है। उस सन्नाटे में सबकी सांसें सुनाई दे रही थीं।

मौत का प्रमाणपत्र और सबके चेहरे

जब वो प्रमाणपत्र सामने आया, तो सबके चेहरे बदल गए। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे सीन देखकर लगता है कि अब कहानी नई दिशा लेगी। उस कागज ने सबके दिलों में डर भर दिया, और कमरे में सन्नाटा छा गया।

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