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मैं जिसे चाँद न मिलावां14एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अस्पताल के गलियारे में ड्रामा

अस्पताल के गलियारे में होने वाला यह दृश्य बहुत इमोशनल है। नर्स और डॉक्टर की एंट्री से कहानी में नया मोड़ आता है। मैं जिसे चाँद न मिला में दिखाए गए इस टकराव को देखकर लगता है कि आगे क्या होने वाला है, यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है।

बिस्तर पर लेटी लड़की की कमजोरी

जब वही लड़की बिस्तर पर लेटी हुई दिखाई देती है, तो उसकी कमजोरी साफ झलकती है। नर्स का उसके पास आना और बातें करना दिखाता है कि वह अकेली नहीं है। मैं जिसे चाँद न मिला में इस तरह के इमोशनल सीन्स दर्शकों को बांधे रखते हैं।

काले कोट वाले शख्स की चुप्पी

काले कोट वाला शख्स पूरे सीन में चुपचाप खड़ा रहता है, लेकिन उसकी आंखों में चिंता साफ दिख रही है। वह सफेद ड्रेस वाली महिला और व्हीलचेयर वाली लड़की के बीच क्या सोच रहा है? मैं जिसे चाँद न मिला में इस किरदार की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है।

नेटशॉर्ट ऐप पर शानदार अनुभव

नेटशॉर्ट ऐप पर मैं जिसे चाँद न मिला देखना एक शानदार अनुभव रहा। वीडियो की क्वालिटी और एक्टिंग इतनी बेहतरीन है कि लगता ही नहीं कि यह एक शॉर्ट वीडियो है। हर फ्रेम में इतनी गहराई है कि बार-बार देखने का मन करता है।

नर्स का सपोर्टिव रोल

नर्स का किरदार बहुत सपोर्टिव और दयालु दिखाया गया है। वह मरीज की देखभाल करते हुए उससे बातें करती है, जो दिखाता है कि अस्पताल में भी इंसानियत जिंदा है। मैं जिसे चाँद न मिला में यह छोटा लेकिन असरदार किरदार कहानी को आगे बढ़ाता है।

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