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मैं जिसे चाँद न मिलावां1एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

डॉक्टर की बात सुनकर रूह कांप गई

जब डॉक्टर ने नीरजा को उसकी बीमारी के बारे में बताया, तो उस चेहरे पर जो मुस्कान थी, वह सबसे ज्यादा दर्दनाक थी। वह जानती थी कि उसका वक्त कम है, फिर भी वह हंस रही थी। मैं जिसे चाँद न मिला की कहानी में यह दिखाया गया है कि कैसे इंसान मौत के सामने भी उम्मीद नहीं छोड़ता। अस्पताल का माहौल और वह संवाद बहुत प्रभावशाली थे।

आकाश और सुमन का घमंड टूट गया

अमीर मां और बेटे का अहंकार उस वक्त चकनाचूर हो गया जब उन्होंने नीरजा को देखा। सुमन का व्यवहार और आकाश की हैरानी साफ बता रही थी कि उन्हें अपनी गलती का अहसास हो रहा है। मैं जिसे चाँद न मिला में वर्ग अंतर को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। नीरजा की गरीबी उनके अमीरी पर भारी पड़ रही थी।

गलियारे में अकेली नीरजा

अस्पताल के लंबे गलियारे में नीरजा का अकेले बैठना और रोना, यह दृश्य किसी को भी रुला सकता है। नर्सों की बातचीत और फिर उसका कोने में सिकुड़ जाना, यह सब बहुत वास्तविक लगा। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे दृश्य हैं जो बिना संवाद के भी पूरी कहानी कह देते हैं। उसकी कमजोरी और अकेलापन साफ झलक रहा था।

मैनेजर का इंसानियत से शर्मसार चेहरा

मैनेजर का नीरजा पर चिल्लाना और उसे नौकरी से निकालने की धमकी देना, यह दिखाता है कि कैसे पावर में बैठे लोग बेचारे मजदूरों को कुचल देते हैं। जब नीरजा ने गिड़गिड़ाया, तब भी उसे रहम नहीं आया। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे खलनायक किरदार होते हैं जो असल जिंदगी की कड़वाहट याद दिलाते हैं। उसका घमंड देखकर गुस्सा आता है।

फोन कॉल वाली उम्मीद

नीरजा का फोन पर बात करते हुए चेहरा, जिस पर पहले डर था और फिर थोड़ी राहत, यह बहुत खूबसूरत तरीके से शूट किया गया था। शायद उसे किसी से मदद मिलने की उम्मीद थी। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे छोटे-छोटे पल होते हैं जो कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसकी आवाज में जो कांपन था, वह दिल को छू गया।

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