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मैं जिसे चाँद न मिलावां40एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

बच्चों की मासूमियत

बच्चों का दृश्य बहुत ही प्यारा लगा। उनकी मासूमियत और खेलने का तरीका देखकर लगता है कि वे किसी बड़ी समस्या से अनजान हैं। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि बच्चों की दुनिया कितनी सरल और सुंदर होती है। वयस्कों के बीच की तनावपूर्ण स्थिति के बीच बच्चों का यह दृश्य एक राहत की तरह लगता है।

तनावपूर्ण माहौल

इस दृश्य में तनाव का माहौल बहुत अच्छे से दिखाया गया है। पुरुष और महिला के बीच की चुप्पी और महिला के आंसू एक गहरे संघर्ष को दर्शाते हैं। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि कभी-कभी शब्दों से ज्यादा चुप्पी बोलती है। बच्चों का दृश्य भी इस तनाव के बीच एक विरोधाभास पैदा करता है।

भावनात्मक गहराई

इस दृश्य में भावनाओं की गहराई बहुत अच्छे से दिखाई गई है। महिला का रोना और पुरुष का चुप रहना एक गहरे दर्द को बयां करता है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि हर आंसू के पीछे एक कहानी छिपी होती है। बच्चों का दृश्य भी बहुत मासूमियत भरा है, जो कहानी को और गहरा बनाता है।

मासूमियत का प्रतीक

बच्चों का दृश्य बहुत ही प्यारा लगा। उनकी मासूमियत और खेलने का तरीका देखकर लगता है कि वे किसी बड़ी समस्या से अनजान हैं। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि बच्चों की दुनिया कितनी सरल और सुंदर होती है। वयस्कों के बीच की तनावपूर्ण स्थिति के बीच बच्चों का यह दृश्य एक राहत की तरह लगता है।

चुप्पी का दर्द

इस दृश्य में तनाव का माहौल बहुत अच्छे से दिखाया गया है। पुरुष और महिला के बीच की चुप्पी और महिला के आंसू एक गहरे संघर्ष को दर्शाते हैं। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि कभी-कभी शब्दों से ज्यादा चुप्पी बोलती है। बच्चों का दृश्य भी इस तनाव के बीच एक विरोधाभास पैदा करता है।

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