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मैं जिसे चाँद न मिलावां28एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

हरा सूट वाली महिला का रहस्य

वह महिला जो हरे रंग के ट्वीड सूट में है, उसके चेहरे के भाव बहुत गहरे हैं। वह सब कुछ कंट्रोल कर रही है, लेकिन उसकी आँखों में एक डर भी छिपा है। जब वह कार का दरवाजा खोलती है, तो लगता है जैसे वह किसी बड़े झटके की तैयारी कर रही हो। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसका हर इशारा मायने रखता है।

व्हीलचेयर और कार का सीन

जब लड़के ने व्हीलचेयर से लड़की को कार में बिठाया, तो उसकी देखभाल साफ झलक रही थी। लेकिन फिर अचानक सिक्योरिटी गार्ड का आना और उस लड़के का हैरान होना, सब कुछ बदल देता है। मैं जिसे चाँद न मिला के इस एपिसोड में यह सीन सबसे ज्यादा इमोशनल था। लगता है जैसे कोई बड़ी साजिश रची जा रही हो और ये बेचारे पात्र उसके जाल में फंस रहे हैं।

सिक्योरिटी गार्ड का एंट्री

जैसे ही सिक्योरिटी गार्ड आता है, पूरी हवा बदल जाती है। वह लड़का जो पहले से ही तनाव में था, अब और भी घबरा गया है। गार्ड की वर्दी और उसका रवैया बता रहा है कि यहाँ कुछ गड़बड़ है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे छोटे-छोटे किरदार भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। यह सीन बताता है कि अब मामला पुलिस या अस्पताल प्रशासन तक पहुँच सकता है।

लड़की की मुस्कान और आँसू

कार के अंदर बैठी लड़की की मुस्कान बहुत मासूम लग रही थी, लेकिन उसकी आँखों में एक उदासी भी थी। जब वह बाहर देख रही थी, तो लग रहा था जैसे वह किसी को ढूंढ रही हो। मैं जिसे चाँद न मिला में इस किरदार की मासूमियत दर्शकों का दिल जीत लेती है। उसकी खामोशी शोर मचा रही है और हमें उसके बारे में और जानने की जिज्ञासा होती है।

अस्पताल का बैकग्राउंड

पूरा सीन अस्पताल के बाहर सेट है, जिसकी पीली इमारत और साइन बोर्ड माहौल को और भी गंभीर बना रहे हैं। जब एम्बुलेंस या स्ट्रेचर की झलक मिलती है, तो दिल की धड़कन तेज हो जाती है। मैं जिसे चाँद न मिला के सेट डिजाइन ने इस कहानी की गंभीरता को बहुत अच्छे से कैप्चर किया है। यह जगह सिर्फ एक लोकेशन नहीं, बल्कि कहानी का एक अहम हिस्सा है।

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