PreviousLater
Close

मैं जिसे चाँद न मिलावां26एपिसोड

like2.0Kchase2.0K

मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

फ्लैशबैक का जादू

जब अस्पताल के सीन से नदी किनारे के सीन में ट्रांजिशन हुआ तो लगा जैसे समय थम गया हो। वो दो महिलाएं और उनका प्यारा संवाद देखकर लगा कि मैं जिसे चाँद न मिला में हर पल की अपनी अहमियत है। फिर वापस अस्पताल आकर वो गुस्सा और तनाव देखकर दिल दहल गया।

दादी का दर्द

दादी का वो गुस्सा और आंसू देखकर लगा कि शायद वो लड़का उनका पोता है और उसने कोई बहुत बड़ी गलती की है। लेकिन जब नदी किनारे वाली यादें आईं तो समझ आया कि ये गुस्सा नहीं बल्कि एक टूटा हुआ दिल है। मैं जिसे चाँद न मिला में हर किरदार के पास एक कहानी है।

चुप्पी का शोर

उस लड़के की चुप्पी और दादी का गुस्सा देखकर लगा कि शब्दों की जरूरत ही नहीं है। सब कुछ आँखों से कह दिया गया। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे सीन्स हैं जो दिल को छू लेते हैं। नदी किनारे वाली यादें और अस्पताल का दर्द सब कुछ एक दूसरे से जुड़ा हुआ लग रहा है।

यादों का दर्द

नदी किनारे बैठी वो दो महिलाएं और उनका प्यारा संवाद देखकर मन शांत हो गया। फिर अचानक अस्पताल का सीन आया तो रोंगटे खड़े हो गए। दादी का वो गुस्सा किसी बात पर नहीं बल्कि किसी गहरे दर्द पर था। मैं जिसे चाँद न मिला की कहानी में ये फ्लैशबैक बहुत मायने रखते हैं।

अस्पताल का राज़

जब वो चमकदार जैकेट पहने लड़का अस्पताल के कमरे में घुसा तो माहौल में एक अजीब सी तनावपूर्ण खामोशी छा गई। बूढ़ी दादी का गुस्सा और आंसू देखकर दिल पसीज गया। लगता है मैं जिसे चाँद न मिला में कोई बहुत बड़ा राज़ खुलने वाला है। उस लड़के की आँखों में डर और पछतावा साफ़ दिख रहा था।

और भी शानदार समीक्षाएँ (5)
arrow down