जब वो आदमी ज़मीन पर गिरा, तो लगा जैसे 'मैं जिसे चाँद न मिला' की कहानी का सबसे दर्दनाक मोड़ आ गया हो। डॉक्टर और औरतें घबरा गईं। उसकी पीड़ा देखकर दिल भारी हो गया। क्या ये सब उस लड़की की वजह से हुआ?
अस्पताल का वो लंबा कॉरिडोर अब ड्रामे का मंच बन गया है। 'मैं जिसे चाँद न मिला' में हर किरदार की भावनाएं साफ़ दिख रही हैं। कोई चिल्ला रहा है, कोई रो रहा है, कोई चुपचाप देख रहा है। सब कुछ इतना असली लग रहा है।
उस लड़की के स्वेटर पर लिखे सवाल उसे परिभाषित करते हैं। 'मैं जिसे चाँद न मिला' में वो सिर्फ एक किरदार नहीं, बल्कि हर उस इंसान की आवाज़ है जो खुद को ढूंढ रहा है। उसकी छुरी शायद गुस्से का प्रतीक है।
भूरे सूट वाली औरत की आँखों में हैरानी और गुस्सा दोनों थे। 'मैं जिसे चाँद न मिला' में औरतें कमज़ोर नहीं, बल्कि ताकतवर दिखाई देती हैं। वो सब कुछ संभालने की कोशिश कर रही हैं, चाहे हालात कितने भी खराब क्यों न हों।
जब उस आदमी के पेट से खून निकला, तो 'मैं जिसे चाँद न मिला' का माहौल और भी गंभीर हो गया। चीखें, भागदौड़, और बेचैनी। लग रहा था जैसे कोई बुरा सच सामने आने वाला है। सबकी नज़रें उस लड़की पर थीं।