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मैं जिसे चाँद न मिलावां58एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

गिरता हीरो

जब वो आदमी ज़मीन पर गिरा, तो लगा जैसे 'मैं जिसे चाँद न मिला' की कहानी का सबसे दर्दनाक मोड़ आ गया हो। डॉक्टर और औरतें घबरा गईं। उसकी पीड़ा देखकर दिल भारी हो गया। क्या ये सब उस लड़की की वजह से हुआ?

कॉरिडोर का ड्रामा

अस्पताल का वो लंबा कॉरिडोर अब ड्रामे का मंच बन गया है। 'मैं जिसे चाँद न मिला' में हर किरदार की भावनाएं साफ़ दिख रही हैं। कोई चिल्ला रहा है, कोई रो रहा है, कोई चुपचाप देख रहा है। सब कुछ इतना असली लग रहा है।

भूरे स्वेटर वाली लड़की

उस लड़की के स्वेटर पर लिखे सवाल उसे परिभाषित करते हैं। 'मैं जिसे चाँद न मिला' में वो सिर्फ एक किरदार नहीं, बल्कि हर उस इंसान की आवाज़ है जो खुद को ढूंढ रहा है। उसकी छुरी शायद गुस्से का प्रतीक है।

औरतों का गुस्सा

भूरे सूट वाली औरत की आँखों में हैरानी और गुस्सा दोनों थे। 'मैं जिसे चाँद न मिला' में औरतें कमज़ोर नहीं, बल्कि ताकतवर दिखाई देती हैं। वो सब कुछ संभालने की कोशिश कर रही हैं, चाहे हालात कितने भी खराब क्यों न हों।

खून और चीखें

जब उस आदमी के पेट से खून निकला, तो 'मैं जिसे चाँद न मिला' का माहौल और भी गंभीर हो गया। चीखें, भागदौड़, और बेचैनी। लग रहा था जैसे कोई बुरा सच सामने आने वाला है। सबकी नज़रें उस लड़की पर थीं।

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