भीड़भाड़ वाले शहर में वह अकेली खड़ी है, जैसे दुनिया से कटी हुई हो। उसके कपड़ों पर लिखा सवाल 'मैं कौन हूँ?' सीधे दिल में उतर जाता है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि हर इंसान के अंदर एक ऐसा सवाल छिपा होता है।
ऊँची इमारत पर लगे बिलबोर्ड पर उसकी तस्वीर देखकर वह चौंक जाती है। क्या यह उसका भविष्य है या फिर कोई सपना? मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे मोड़ देखकर लगता है कि जिंदगी कभी-कभी अजीबोगरीब खेल खेलती है।
दो लड़के उसे देख रहे हैं, जैसे उसे पहचानते हों। क्या वे उसके पुराने दोस्त हैं या फिर कोई नया रहस्य? मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे पल देखकर लगता है कि हर मुलाकात एक नई कहानी शुरू कर सकती है।
वह मुस्कुरा रही है, लेकिन उसकी आँखों में दर्द साफ झलक रहा है। जैसे वह किसी बात को छिपाने की कोशिश कर रही हो। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे पल देखकर लगता है कि कभी-कभी मुस्कान भी आँसुओं को छिपा लेती है।
शहर की चमक-धमक के बीच वह अंधेरे में खड़ी है। उसके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि कभी-कभी रोशनी भी अंधेरे को नहीं मिटा सकती।