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मैं जिसे चाँद न मिलावां55एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

शहर की भीड़ में अकेली

भीड़भाड़ वाले शहर में वह अकेली खड़ी है, जैसे दुनिया से कटी हुई हो। उसके कपड़ों पर लिखा सवाल 'मैं कौन हूँ?' सीधे दिल में उतर जाता है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि हर इंसान के अंदर एक ऐसा सवाल छिपा होता है।

बिलबोर्ड पर उसकी तस्वीर

ऊँची इमारत पर लगे बिलबोर्ड पर उसकी तस्वीर देखकर वह चौंक जाती है। क्या यह उसका भविष्य है या फिर कोई सपना? मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे मोड़ देखकर लगता है कि जिंदगी कभी-कभी अजीबोगरीब खेल खेलती है।

दो लड़कों की नज़रें

दो लड़के उसे देख रहे हैं, जैसे उसे पहचानते हों। क्या वे उसके पुराने दोस्त हैं या फिर कोई नया रहस्य? मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे पल देखकर लगता है कि हर मुलाकात एक नई कहानी शुरू कर सकती है।

उसकी मुस्कान में छिपा दर्द

वह मुस्कुरा रही है, लेकिन उसकी आँखों में दर्द साफ झलक रहा है। जैसे वह किसी बात को छिपाने की कोशिश कर रही हो। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे पल देखकर लगता है कि कभी-कभी मुस्कान भी आँसुओं को छिपा लेती है।

शहर की रोशनी में अंधेरा

शहर की चमक-धमक के बीच वह अंधेरे में खड़ी है। उसके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि कभी-कभी रोशनी भी अंधेरे को नहीं मिटा सकती।

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