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मैं जिसे चाँद न मिलावां53एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सूट वाले आदमी का प्रवेश

जैसे ही वो सूट पहने आदमी अंदर आता है, वातावरण बदल जाता है। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक है, जैसे वो कुछ छुपा रहा हो। मैं जिसे चाँद न मिला की कहानी में ऐसे मोड़ ही सबसे ज्यादा रोचक लगते हैं। हर किरदार के बीच का सामंजस्य बहुत गहरा है।

लाल स्वेटर वाली महिला की प्रतिक्रिया

उस महिला के चेहरे पर जो भावनाएं हैं, वो शब्दों में बयां नहीं की जा सकतीं। वो नाराज भी लग रही है और दुखी भी। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे जटिल भावनाओं को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। हर दृश्य में एक नई कहानी छुपी है।

पोती की चुप्पी का मतलब

वो लड़की जो शुरू में चुपचाप खड़ी थी, अब उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान है। लगता है वो कुछ जानती है जो बाकी नहीं जानते। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे सूक्ष्म पल ही सबसे ज्यादा दिलचस्प लगते हैं। हर भाव-भंगिमा में एक राज छुपा है।

दादी का इशारा और उसका मतलब

जब दादी अपनी पोती के पेट की तरफ इशारा करती हैं, तो लगता है जैसे वो किसी बड़े रहस्य को उजागर करने वाली हों। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे नाटकीय पल ही सबसे ज्यादा दिलचस्प लगते हैं। हर किरदार के बीच का तनाव बहुत गहरा है।

सूट वाले आदमी की आंखें

उस आदमी की आंखों में जो दर्द और गुस्सा है, वो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। लगता है वो किसी बड़े धोखे का शिकार हुआ है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे भावनात्मक परतें ही सबसे ज्यादा पसंद आते हैं। हर दृश्य में एक नई कहानी छुपी है।

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