PreviousLater
Close

मैं जिसे चाँद न मिलावां50एपिसोड

like2.0Kchase2.0K

मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

नजरों का खेल और अनकही बातें

इस दृश्य में संवाद से ज्यादा असरदार नजरें थीं। चश्मे वाले शख्स की गंभीरता और भूरे कपड़ों वाली महिला की चिंता किसी पुराने राज को इशारा कर रही थी। जब वो दूसरी महिला आई, तो सबकी सांसें रुक सी गईं। मैं जिसे चाँद न मिला की खासियत है कि वो छोटे-छोटे इशारों से बड़ी कहानियाँ बुनती है। बुजुर्ग दादी का मुस्कुराना उस तनाव को तोड़ने जैसा था, पर नई महिला की आँखों में कुछ और ही तूफान था।

रिश्तों की बारीकियाँ और टकराव

जब तीन पीढ़ियाँ एक साथ आईं, तो हर चेहरे पर अलग-अलग कहानी लिखी थी। सूट वाला शख्स बीच में खड़ा था जैसे किसी फैसले की प्रतीक्षा में हो। भूरे स्वेटर वाली महिला की घबराहट और नई महिला का आत्मविश्वास एक दूसरे के विपरीत थे। मैं जिसे चाँद न मिला में रिश्तों की ये पेचीदगियाँ बहुत खूबसूरती से दिखाई गई हैं। लगता है आगे कोई बड़ा खुलासा होने वाला है जो सबकी जिंदगी बदल देगा।

माहौल का जादू और किरदारों की चुप्पी

बांस के पेड़ों वाले उस रास्ते पर खड़े होकर जब वो सब एक दूसरे को देख रहे थे, तो लगा जैसे वक्त थम गया हो। चश्मे वाले शख्स की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। भूरे कपड़ों वाली महिला की आँखों में सवाल थे और नई महिला के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान। मैं जिसे चाँद न मिला का ये एपिसोड बताता है कि कभी-कभी चुप रहना सबसे बड़ा जवाब होता है। बुजुर्ग महिला का हाथ थामना उस पल को संभालने जैसा था।

फैशन से ज़्यादा भावनाएं

हर किरदार के कपड़े उनकी शख्सियत बयां कर रहे थे। कड़क ब्लैक सूट वाला शख्स सख्त मिजाज लग रहा था, जबकि भूरे स्वेटर वाली महिला नरम दिल लगती थीं। नई महिला का ग्रे ड्रेस और कंधे पर फूल उसकी अलग पहचान था। मैं जिसे चाँद न मिला में कॉस्ट्यूम डिजाइनर ने कमाल कर दिया है। जब सब एक साथ आए, तो लगा जैसे अलग-अलग दुनियाएं टकरा रही हों। हर लिबास के पीछे एक कहानी छिपी थी जो धीरे-धीरे खुल रही है।

दादी का आगमन और माहौल में बदलाव

जैसे ही बुजुर्ग महिला आईं, सबके चेहरे बदल गए। उनकी मुस्कान में वो ताकत थी जो सबके गुस्से को शांत कर दे। चश्मे वाले शख्स ने झुककर सम्मान दिया और भूरे स्वेटर वाली महिला की आँखों में राहत दिखी। मैं जिसे चाँद न मिला में बुजुर्ग किरदारों को जो अहमियत दी गई है, वो काबिले तारीफ है। लगता है ये दादी ही उस परिवार की धुरी हैं जो सबको जोड़े रखती हैं। उनकी मौजूदगी से हर मुश्किल आसान लगती है।

और भी शानदार समीक्षाएँ (5)
arrow down