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मैं जिसे चाँद न मिलावां39एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अस्पताल का वो दर्दनाक पल

जब अस्पताल के बेड पर बैठी लड़की के मुंह से खून टपकता है, तो दिल सच में रुक सा जाता है। उस लड़के का गुस्सा और फिर उसकी मदद के लिए दौड़ पड़ना, यह इमोशनल रोलरकोस्टर है। मैं जिसे चाँद न मिला की कहानी में यह हिंसा और फिर देखभाल का कॉन्ट्रास्ट बहुत गहरा असर छोड़ता है। नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन देखना एडिक्टिव हो गया है।

ग्रे सूट वाली लड़की का खेल

यह किरदार सच में बहुत लेयरड है। कभी मासूमियत दिखाती है तो कभी आंखों में चालाकी। केटीवी वाले सीन में उसका अंदाज देखकर लगता है कि वह सब कुछ प्लान कर रही है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे विलेन या एंटी हीरोइन किरदार हमेशा कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसकी हर एक्सप्रेशन बदलती है, जो एक्टिंग की तारीफ करने पर मजबूर कर देती है।

गुस्से में पागल लड़का

लड़के का गुस्सा देखकर डर लगता है, खासकर जब वह अस्पताल में उस लड़की पर चिल्लाता है। लेकिन फिर उसी का हाथ पकड़कर उठाना दिखाता है कि उसके अंदर भी दर्द है। मैं जिसे चाँद न मिला में किरदारों के बीच यह पुश पुल डायनामिक्स बहुत अच्छे से लिखे गए हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इंटेंस सीन देखना मेरी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।

ब्राउन ड्रेस वाली की चुप्पी

वह महिला जो पूरे समय चुपचाप खड़ी है, उसकी आंखों में कितनी कहानी छिपी है। शायद वह सब जानती है लेकिन बोल नहीं सकती। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे साइलेंट किरदार अक्सर कहानी की चाबी होते हैं। केटीवी वाले सीन में उसका स्टोन फेस देखकर लगता है कि वह किसी बड़े फैसले के कगार पर है।

फ्लैशबैक की ताकत

वर्तमान के तनावपूर्ण माहौल से अचानक अस्पताल के पुराने सीन में जाना, यह एडिटिंग कमाल की है। दर्शक को तुरंत समझ आ जाता है कि यह सब पिछली गलतियों का नतीजा है। मैं जिसे चाँद न मिला में टाइमलाइन का यह खेल कहानी को और भी रोचक बना देता है। नेटशॉर्ट पर ऐसे स्मार्ट राइटिंग वाले शो देखना सुकून देता है।

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