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मैं जिसे चाँद न मिलावां33एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

भूरे स्वेटर वाली महिला का दर्द

उस महिला के चेहरे पर जो बेचैनी थी, वह शब्दों से बयां नहीं की जा सकती। जब वह अपनी कमर पर बंधी बेल्ट को छूती है, तो लगता है जैसे वह अपने आप को संभालने की कोशिश कर रही हो। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे पल दिखाते हैं कि रिश्तों की डोर कितनी नाजुक होती है, जो एक झटके में टूट सकती है।

नीली जैकेट वाला लड़का फंस गया

उस लड़के का चेहरा पीला पड़ गया जब उसे एहसास हुआ कि सब कुछ रिकॉर्ड हो रहा है। उसकी आंखों में सवाल थे, लेकिन जुबान पर ताला लगा था। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे किरदार दिखाए गए हैं जो अपनी गलतियों के बोझ तले दबे हुए हैं, और यह दृश्य उसी का सबूत है।

कमरे की खामोशी चीख रही है

लक्जरी सोफे, महंगी पेंटिंग्स, लेकिन माहौल में इतना तनाव कि सांस लेना मुश्किल हो जाए। जब काले सूट वाला शख्स रिकॉर्डिंग पेन दिखाता है, तो लगता है जैसे समय थम गया हो। मैं जिसे चाँद न मिला के इस सीन में डायलॉग से ज्यादा खामोशी बोलती है, जो दर्शक को बांधे रखती है।

रिकॉर्डिंग पेन सच्चाई की चाबी

वह छोटा सा काला डिवाइस सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि सच्चाई की चाबी है। जब वह ऑन होता है, तो तीनों के चेहरे के भाव बदल जाते हैं। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे प्रतीकों का इस्तेमाल कहानी को आगे बढ़ाता है, जहां एक छोटी सी चीज बड़े राज खोल सकती है।

तीनों के बीच की दूरी

एक तरफ नीली जैकेट वाला लड़का, दूसरी तरफ भूरे स्वेटर वाली महिला, और बीच में काले सूट वाला शख्स। उनके बीच की दूरी सिर्फ फीट में नहीं, बल्कि भावनाओं में भी है। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे दृश्य दिखाते हैं कि रिश्ते कितने जटिल हो सकते हैं, जहां हर कदम पर संदेह होता है।

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