डॉक्टर साहब की आँखों में वो दर्द जो वो छिपा रहे हैं, वो सबसे ज्यादा बोझिल लगता है। मैं जिसे चाँद न मिला में जब वो बूढ़ी माँ से बात करते हैं, तो लगता है जैसे वो खुद टूट रहे हों। उनकी चुप्पी में हजारों शब्द छिपे हैं।
बेटी के माथे पर लाल निशान और होंठों से खून... मैं जिसे चाँद न मिला में यह दृश्य देखकर सांस रुक गई। नर्स का ध्यान से साफ करना, फिर भी वो बेहोश पड़ी है। माँ का रोना और डॉक्टर की चुप्पी — सब कुछ इतना वास्तविक लगता है।
बूढ़ी माँ के हाथ जब बेटी के चेहरे को छूते हैं, तो उनमें जो कंपन है, वो दिल को चीर देता है। मैं जिसे चाँद न मिला में यह दृश्य इतना भावुक है कि लगता है जैसे माँ का दर्द हमारे सीने में उतर गया हो। उसकी आँखों में बेबसी साफ दिखती है।
नर्स कुछ नहीं बोलती, बस काम करती रहती है। मैं जिसे चाँद न मिला में उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा बोझिल लगती है। वो जानती है कि अब कुछ नहीं हो सकता, फिर भी वो अपना कर्तव्य निभा रही है। उसकी आँखों में भी दर्द छिपा है।
बिस्तर पर खून के धब्बे देखकर लगता है जैसे उम्मीदें भी खून से सनी हों। मैं जिसे चाँद न मिला में यह दृश्य इतना दर्दनाक है कि कोई भी रो पड़े। बूढ़ी माँ का रोना और डॉक्टर की बेबसी — सब कुछ इतना वास्तविक लगता है।