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मैं जिसे चाँद न मिलावां13एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

व्हीलचेयर वाली मुस्कान

अंत में व्हीलचेयर पर बैठी लड़की की मुस्कान ने सब कुछ बदल दिया। इतना दर्द और रोना-धोना देखने के बाद उसकी शांत और थोड़ी शैतानी मुस्कान एक अलग ही कहानी कहती है। क्या वह सब कुछ जानती थी? मैं जिसे चाँद न मिला की कहानी में यह ट्विस्ट बहुत गहरा है। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी जो बता रही थी कि यह खेल अभी खत्म नहीं हुआ है।

चिट्ठी का राज

शुरुआत में वह लड़की जो इतने ध्यान से चिट्ठी लिख रही थी, उसकी आंखों में जो उदासी थी वह सब कुछ बता देती है। फिर वही चिट्ठी जब उस अमीर महिला के हाथ लगती है, तो माहौल बदल जाता है। मैं जिसे चाँद न मिला में लिखे गए हर शब्द का वजन महसूस होता है। ऐसा लगता है कि उस कागज के टुकड़े में किसी की पूरी जिंदगी कैद थी जो अब बाहर आ गई है।

गुस्से का विस्फोट

जब पुरुष पात्र को गुस्सा आता है और वह डॉक्टर पर चिल्लाता है, तो स्क्रीन पर तनाव साफ दिखाई देता है। उसकी आंखों में लाली और चेहरे पर नफरत साफ झलक रही थी। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे सीन्स एक्टिंग का कमाल होते हैं। वह सिर्फ गुस्सा नहीं था, बल्कि एक टूटा हुआ दिल था जो चीख रहा था कि उसे कोई नहीं समझ रहा है।

खून के आंसू

जब वह महिला जोर-जोर से रोती है और अचानक उसके मुंह से खून निकलता है, तो यह दृश्य बहुत ही डरावना और दुखद था। यह सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि अंदरूनी दर्द का बाहर आना था। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे दृश्य दिखाते हैं कि शब्द कम पड़ जाते हैं। उसका गिरना और उस पुरुष का उसे संभालना एक टूटे हुए रिश्ते की कहानी कहता है।

शांत चेहरे का राज

व्हीलचेयर पर बैठी लड़की का चेहरा बिल्कुल शांत था, जबकि चारों तरफ कोहराम मचा हुआ था। उसकी इस खामोशी ने सबका ध्यान खींच लिया। मैं जिसे चाँद न मिला में किरदारों की चुप्पी भी शोर मचाती है। ऐसा लगता है कि वह सब कुछ देख रही है और अपने दिमाग में कुछ और ही योजना बना रही है। उसकी आंखें सब कुछ बयां कर रही थीं।

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