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मैं जिसे चाँद न मिलावां11एपिसोड

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मैं जिसे चाँद न मिला

बचपन में खोई नीरजा को एक दयालु दादी ने पाला। बीमार दादी के इलाज के लिए उसने अपना किडनी दान कर दिया। तब पता चला कि किडनी लेने वाली लड़की उसकी सौतेली बहन है और अमीर घराने की मालकिन सुमन उसकी असली माँ। माँ और भाई ने नीरजा को अपनाने से इनकार कर दिया। दुखी नीरजा को प्रो. गौरी ने गोद लिया। नीरजा अब गौरी की बेटी है – गौरी। उसने अपनी मेहनत से कैंसर की दवा बनाई और बड़ी वैज्ञानिक बनी। असली माँ और भाई बाद में पछताए, पर गौरी ने उन्हें माफ कर दिया और अपने असली घर – गौरी के घर – में ही रहने का फैसला किया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

परिवार का असली चेहरा

कॉरिडोर में खड़े होकर लड़ते हुए ये लोग दिखाते हैं कि पैसा और जायदाद के लिए रिश्ते कैसे टूटते हैं। मैं जिसे चाँद न मिला में ये सीन सबसे ज्यादा दिल को छू गया। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामे देखकर लगता है कि असल जिंदगी भी ऐसी ही होती है।

ऑपरेशन थिएटर का सस्पेंस

जब सर्जरी शुरू हुई तो हर सेकंड तनाव से भरा था। डॉक्टरों की फुर्ती और मरीज की हालत देखकर डर लग रहा था। मैं जिसे चाँद न मिला में ये पार्ट सबसे ज्यादा इंटेंस था। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन्स देखकर लगता है कि हम भी वहीं मौजूद हैं।

वसीयत का राज

एक कागज के टुकड़े ने सब कुछ बदल दिया। जब वो लिफाफा खुला तो सबकी आंखें फटी रह गईं। मैं जिसे चाँद न मिला में ये ट्विस्ट सबसे ज्यादा शॉकिंग था। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे प्लॉट देखकर लगता है कि लेखक ने बहुत गहराई से सोचा है।

मां का दर्द और बेटे की बेबसी

जब मां ने छाती पकड़ी और बेटा उसे संभालने लगा, तो लगा कि असली दर्द वहीं है। मैं जिसे चाँद न मिला में ये सीन सबसे ज्यादा इमोशनल था। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे पल देखकर आंखें नम हो जाती हैं।

नर्स का रोल और उसकी चुप्पी

नर्स ने सब कुछ देखा लेकिन कुछ नहीं कहा। उसकी चुप्पी में हजारों बातें छिपी थीं। मैं जिसे चाँद न मिला में ये किरदार सबसे ज्यादा रहस्यमयी लगा। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे किरदार देखकर लगता है कि हर कोई कुछ छिपा रहा है।

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