जब डॉक्टर ने नीरजा को उसकी बीमारी के बारे में बताया, तो उस चेहरे पर जो मुस्कान थी, वह सबसे ज्यादा दर्दनाक थी। वह जानती थी कि उसका वक्त कम है, फिर भी वह हंस रही थी। मैं जिसे चाँद न मिला की कहानी में यह दिखाया गया है कि कैसे इंसान मौत के सामने भी उम्मीद नहीं छोड़ता। अस्पताल का माहौल और वह संवाद बहुत प्रभावशाली थे।
अमीर मां और बेटे का अहंकार उस वक्त चकनाचूर हो गया जब उन्होंने नीरजा को देखा। सुमन का व्यवहार और आकाश की हैरानी साफ बता रही थी कि उन्हें अपनी गलती का अहसास हो रहा है। मैं जिसे चाँद न मिला में वर्ग अंतर को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। नीरजा की गरीबी उनके अमीरी पर भारी पड़ रही थी।
अस्पताल के लंबे गलियारे में नीरजा का अकेले बैठना और रोना, यह दृश्य किसी को भी रुला सकता है। नर्सों की बातचीत और फिर उसका कोने में सिकुड़ जाना, यह सब बहुत वास्तविक लगा। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे दृश्य हैं जो बिना संवाद के भी पूरी कहानी कह देते हैं। उसकी कमजोरी और अकेलापन साफ झलक रहा था।
मैनेजर का नीरजा पर चिल्लाना और उसे नौकरी से निकालने की धमकी देना, यह दिखाता है कि कैसे पावर में बैठे लोग बेचारे मजदूरों को कुचल देते हैं। जब नीरजा ने गिड़गिड़ाया, तब भी उसे रहम नहीं आया। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे खलनायक किरदार होते हैं जो असल जिंदगी की कड़वाहट याद दिलाते हैं। उसका घमंड देखकर गुस्सा आता है।
नीरजा का फोन पर बात करते हुए चेहरा, जिस पर पहले डर था और फिर थोड़ी राहत, यह बहुत खूबसूरत तरीके से शूट किया गया था। शायद उसे किसी से मदद मिलने की उम्मीद थी। मैं जिसे चाँद न मिला में ऐसे छोटे-छोटे पल होते हैं जो कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसकी आवाज में जो कांपन था, वह दिल को छू गया।