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वैद्य भी, योद्धा भीवां30एपिसोड

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वैद्य भी, योद्धा भी

परम योद्धा आरव सिंह अपने शुद्ध तेज शरीर के कारण नींव स्तर के शिखर पर अटका था। उसके गुरु साधक ने उसे उस लड़की को खोजने का आदेश दिया जिसके शरीर पर "रहस्यमयी निशान" हो, ताकि वह अपनी रुकावट तोड़ सके। गुरु ने उसकी गुरु बहनों को भी मदद करने भेजा। पहाड़ से उतरने की उसी रात, आरव की मुलाकात चंद्र ग्रुप की सीईओ तारा चंद्र से हुई। वह उसका बॉयफ्रेंड बन गया और उसकी सहेलियों की रक्षा करने लगा। अपनी चिकित्सा और युद्ध कला के दम पर, आरव ने दुश्मनों को मुँह की खाई और जिंदगी की सबसे ऊँची सीढ़ी पर पहुँच गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

घमंड का अंत

खलनायक का घमंड टूटते देख मुझे बहुत मजा आ गया। शुरू में वह शराब पी रहा था पर अंत में घुटनों पर था। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसा ट्विस्ट बिल्कुल उम्मीद नहीं था। नायक की शक्ति देखकर मैं बहुत हैरान हुआ। भालू वाला चित्रण थोड़ा अजीब था पर मारधाड़ वाला दृश्य जबरदस्त लगा। सुंदरी की घबराहट असली लग रही थी। कुल मिलाकर यह भाग बहुत मनोरंजक रहा और मैं अगला भाग देखने के लिए बेताब हूं। यह कहानी आगे क्या मोड़ लेगी देखना बाकी है।

ताकत का प्रदर्शन

लाल कमीज वाले व्यक्ति को लगा वह बहुत ताकतवर है। पर नायक ने एक पल में सब कुछ बदल दिया। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ। खून देखकर लगा कि अब लड़ई गंभीर हो गई है। खाने की मेज पर यह हंगामा किसी को उम्मीद नहीं था। काले लिबास वाली ने डर के मारे अपना शॉल कस लिया। कार्यवाही की गति बहुत तेज थी। मुझे यह शैली बहुत पसंद आया। सभी किरदारों ने अपनी भूमिका निभाई।

भालू की आत्मा

जब भालू की आत्मा दिखाई दी तो मैं पूरी तरह चौंक गया। खलनायक को लगा वह जीत जाएगा। पर नायक की शक्ति के आगे सब कुछ फीका पड़ गया। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे दृश्य बार बार देखने को मिलते हैं। जमीन पर गिरने के बाद उसकी हालत खराब हो गई। माथे पर चोट लगना उसकी हार का संकेत था। कमरे का माहौल बहुत तनावपूर्ण हो गया था। सभी किरदारों ने अच्छा अभिनय किया है। मुझे यह वीडियो पसंद आया।

शांत नायक

सफेद जैकेट वाले ने वाकई कमाल कर दिया। बिना किसी डर के वह सामने खड़ा रहा। वैद्य भी, योद्धा भी का यह दृश्य वाकई यादगार बन गया। खलनायक की चीख सुनकर कानों में दर्द हुआ। वह माफी मांगते हुए दिखाई दिया। यह परिवर्तन बहुत तेजी से हुआ। पीछे बैठे व्यक्ति ने भी डर के मारे मुंह छुपा लिया। रोशनी का प्रभाव बहुत सुंदर लगा। मुझे यह वीडियो बहुत पसंद आया। कहानी रोचक है।

नाटकीय मोड़

शुरुआत में सब कुछ शांत लग रहा था। फिर अचानक हंगामा शुरू हो गया। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसा नाटक देखने को मिलता है। लाल कमीज वाले का अहंकार चूर हो गया। उसने घुटने टेक दिए थे। काले लिबास वाली की आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था। मेज पर खाना रखा था पर किसी का ध्यान नहीं था। यह दृश्य बहुत ही नाटकीय लगा। संपादन और ध्वनि प्रभाव भी बढ़िया थे। मुझे यह शो पसंद है।

मानसिक लड़ई

नायक की शांति देखकर लगता है वह बहुत अनुभवी है। खलनायक कितना भी जोर लगा ले हारा। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी आगे बढ़ती जा रही है। खून का निशान माथे पर बहुत साफ दिखा। वह दर्द से कराह रहा था। कमरे की सजावट बहुत महंगी लग रही थी। क्रिस्टल झूमर नीचे लटक रहा था। यह लड़ई सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक भी थी। अंत में विजेता वही बना जो शांत रहा। यह बात सही है।

भावनाएं और एक्शन

इस वीडियो में मारधाड़ और भावनाएं दोनों हैं। खलनायक की हालत देखकर तरस आया। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे उतार चढ़ाव आम बात हैं। नायक ने बिना हथियार के सबको हरा दिया। काले लिबास वाली ने अपने कपड़े ठीक किए। यह संकेत था कि वह असहज महसूस कर रही थी। पृष्ठभूमि में किताबें सजी थीं। यह जगह किसी बड़े घर जैसी लग रही थी। मुझे यह कहानी बहुत रोचक लगी। आगे क्या होगा देखना है।

महत्वपूर्ण पल

जब वह जमीन पर गिरा तो सबकी सांसें रुक गईं। वैद्य भी, योद्धा भी का यह पल बहुत महत्वपूर्ण है। खलनायक को अपनी गलती का अहसास हो गया। नायक ने उसे छोड़ दिया। यह उसकी महानता को दिखाता है। कमरे में सन्नाटा छा गया था। सभी लोग हैरान होकर देख रहे थे। रोशनी का खेल बहुत अच्छा किया गया था। यह दृश्य फिल्म जैसा लगा। मुझे यह सामग्री बहुत पसंद आया। बहुत बढ़िया काम है।

तेज लड़ई

लाल कमीज वाले ने शुरू में घमंड दिखाया। पर अंत में वह रोने लगा। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसा किरदार निभाना मुश्किल है। नायक की आंखों में गुस्सा साफ दिखा। उसने जोर से वार किया। खलनायक संभल नहीं पाया। पीछे खड़ा व्यक्ति डर के मारे कांप रहा था। यह लड़ई बहुत तेजी से खत्म हो गई। मुझे यह ट्विस्ट बहुत अच्छा लगा। अगला भाग कब आएगा। मैं इंतजार कर रहा हूं।

ऊर्जावान दृश्य

पूरा कमरा हिल गया था लड़ई की वजह से। वैद्य भी, योद्धा भी की यह झलक बहुत शानदार है। खलनायक का घमंड टूटना तय था। नायक की शक्ति का अंदाजा लगा। काले लिबास वाली ने राहत की सांस ली। मेज पर बर्तन बजे थे। यह दृश्य बहुत ही ऊर्जावान था। कलाकारों ने अपनी भूमिका अच्छे से निभाई। मुझे यह शो बहुत पसंद आ रहा है। जल्दी अगला भाग देखना चाहता हूं। कहानी अच्छी है।