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वैद्य भी, योद्धा भीवां16एपिसोड

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वैद्य भी, योद्धा भी

परम योद्धा आरव सिंह अपने शुद्ध तेज शरीर के कारण नींव स्तर के शिखर पर अटका था। उसके गुरु साधक ने उसे उस लड़की को खोजने का आदेश दिया जिसके शरीर पर "रहस्यमयी निशान" हो, ताकि वह अपनी रुकावट तोड़ सके। गुरु ने उसकी गुरु बहनों को भी मदद करने भेजा। पहाड़ से उतरने की उसी रात, आरव की मुलाकात चंद्र ग्रुप की सीईओ तारा चंद्र से हुई। वह उसका बॉयफ्रेंड बन गया और उसकी सहेलियों की रक्षा करने लगा। अपनी चिकित्सा और युद्ध कला के दम पर, आरव ने दुश्मनों को मुँह की खाई और जिंदगी की सबसे ऊँची सीढ़ी पर पहुँच गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

रिपोर्ट ने हिला दिया सबको

इस नाटक में जब काले जैकेट वाले ने वह रिपोर्ट दिखाई तो सबकी सांसें रुक गईं। कमरे में सन्नाटा छा गया और हर किसी के चेहरे पर हैरानी साफ दिख रही थी। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में ऐसा मोड़ किसी ने नहीं सोचा था। फिर उसका केला खाना जैसे सबका मजाक उड़ा रहा हो। यह दृश्य बहुत ही नाटकीय और रोमांचक था। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का अनुभव बहुत अच्छा रहा क्योंकि वीडियो की क्वालिटी साफ थी। मुझे लगता है कि आगे की कहानी और भी दिलचस्प होने वाली है। सबको यह झटका लगा है।

घमंड का अंत

नारंगी सूट वाले का घमंड टूटते हुए देखना बहुत सुकून देने वाला था। जब सच्चाई सामने आई तो वह कुछ बोल नहीं पाया। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे पल बार बार देखने को मिलते हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। नीले सूट वाले की गुस्से भरी नजरें भी काबिले तारीफ थीं। पूरा माहौल तनाव से भरा हुआ था और हर कोई अगले कदम का इंतजार कर रहा था। यह परिवारिक कलह बहुत गहराई से दिखाया गया है। मुझे यह किरदार बहुत पसंद आया क्योंकि उसने डरने के बजाय सच का सामना किया।

हरे कपड़े वाली की हैरानी

हरे कपड़े वाली की प्रतिक्रिया सबसे ज्यादा चौंकाने वाली थी। उसकी आंखों में डर और हैरानी दोनों साफ झलक रहे थे। वैद्य भी, योद्धा भी की पटकथा में हर किरदार का अपना महत्व है। जब उसने अपना गला पकड़ा तो लगा जैसे उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही हो। ऐसे भावनात्मक दृश्य दर्शकों को सीधे दिल पर चोट करते हैं। कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। आगे क्या होगा यह जानने के लिए मैं बेचैन हूं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे शो देखना बहुत सुकून देता है।

दादाजी का दर्द

बूढ़े दादाजी का चेहरा देखकर लग रहा था जैसे उन्हें सबसे ज्यादा ठेस पहुंची हो। उनकी आंखों में निराशा साफ दिख रही थी। वैद्य भी, योद्धा भी में परिवार के मुखिया की भूमिका बहुत मजबूत दिखाई गई है। जब वह कुर्सी पर बैठे रहे तो लगा जैसे वह सब कुछ सहन कर रहे हैं। यह चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। कमरे की सजावट और माहौल बहुत पारंपरिक था जो कहानी को गहराई देता है। मुझे यह पुराने जमाने का घर बहुत पसंद आया। यह दृश्य यादगार बन गया है।

केला और विद्रोह

काले जैकेट वाले लड़के का केला खाना एक तरह का विद्रोह था। उसने बिना कुछ बोले सबको जवाब दे दिया। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे संकेतों का बहुत बड़ा महत्व होता है। उसकी मुस्कान में एक अलग ही चुनौती थी जो सबको चुभ रही थी। लोग चिल्ला रहे थे और वह शांति से फल खा रहा था। यह विरोधाभास बहुत ही शानदार तरीके से दिखाया गया है। दर्शकों को यह हरकत थोड़ी अजीब लगी लेकिन किरदार के लिए सही थी। मुझे यह सीन बहुत पसंद आया क्योंकि यह अनोखा था।

भूरे सूट वाला गुस्से में

भूरे सूट वाले ने जब उंगली उठाई तो लगा जैसे उसने फैसला सुना दिया हो। उसका गुस्सा साफ झलक रहा था और वह बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे क्रोध के दृश्य बहुत तीव्र होते हैं। उसकी आवाज में अधिकार था लेकिन सामने वाले पर कोई असर नहीं हुआ। यह शक्ति संघर्ष बहुत दिलचस्प तरीके से दिखाया गया है। कमरे में खड़े बाकी लोग भी इस बहस का हिस्सा बन गए थे। मुझे यह राजनीति बहुत पसंद आई।

सफेद कपड़े वाली की चुप्पी

सफेद कपड़े वाली की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। वह सब कुछ देख रही थी लेकिन कुछ बोल नहीं रही थी। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे किरदार कहानी की रीढ़ होते हैं। उसकी आंखों में आंसू थे लेकिन उसने गिरने नहीं दिया। यह धैर्य और ताकत का प्रतीक था। जब वह कुर्सी के पीछे खड़ी हुई तो लगा जैसे वह सब संभाल लेगी। मुझे उसका अभिनय बहुत प्रभावशाली लगा। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे किरदार देखने को मिलते हैं।

कमरे का बदला माहौल

पूरे कमरे का माहौल एकदम से बदल गया जब वह कागज सामने आया। पहले सब हंस रहे थे और फिर सन्नाटा छा गया। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे ट्विस्ट बहुत अच्छे लगते हैं। लाल रंग की मेज और पारंपरिक सजावट के बीच यह नाटक बहुत जंचा। हर किसी की सांसें थम गई थीं और सब एक दूसरे को देख रहे थे। यह सामूहिक झटका बहुत ही वास्तविकता के करीब दिखाया गया है। मुझे यह दृश्य बहुत पसंद आया क्योंकि यह अप्रत्याशित था। कहानी आगे बढ़ने वाली है।

अहंकार का पतन

नारंगी सूट वाले का घमंड चूर हो गया जब सच्चाई सामने आई। वह पहले बहुत ऊपर था और अब नीचे गिर गया है। वैद्य भी, योद्धा भी में कर्म का फल बहुत अच्छे से दिखाया गया है। उसका चेहरा पीला पड़ गया और वह कुछ बोल नहीं पाया। यह पतन बहुत ही नाटकीय तरीके से दिखाया गया है। दर्शकों को इससे बहुत संतोष मिला क्योंकि वह अहंकारी था। मुझे यह बदलाव बहुत पसंद आया। यह न्याय का पल था।

अंत नहीं शुरुआत है

अंत में जब सब कुछ शांत हुआ तो लगा जैसे तूफान थम गया हो। लेकिन यह तो बस शुरुआत थी। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में अभी बहुत कुछ बाकी है। काले जैकेट वाले ने केला खाकर सबको चुप करा दिया। यह अंत बहुत ही अनोखा और यादगार था। मुझे नेटशॉर्ट ऐप पर यह शो देखकर बहुत मजा आया। आगे की कड़ी का इंतजार नहीं हो रहा है। यह परिवारिक ड्रामा बहुत गहरा है।