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वैद्य भी, योद्धा भीवां50एपिसोड

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वैद्य भी, योद्धा भी

परम योद्धा आरव सिंह अपने शुद्ध तेज शरीर के कारण नींव स्तर के शिखर पर अटका था। उसके गुरु साधक ने उसे उस लड़की को खोजने का आदेश दिया जिसके शरीर पर "रहस्यमयी निशान" हो, ताकि वह अपनी रुकावट तोड़ सके। गुरु ने उसकी गुरु बहनों को भी मदद करने भेजा। पहाड़ से उतरने की उसी रात, आरव की मुलाकात चंद्र ग्रुप की सीईओ तारा चंद्र से हुई। वह उसका बॉयफ्रेंड बन गया और उसकी सहेलियों की रक्षा करने लगा। अपनी चिकित्सा और युद्ध कला के दम पर, आरव ने दुश्मनों को मुँह की खाई और जिंदगी की सबसे ऊँची सीढ़ी पर पहुँच गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

शुरुआत में ही हंगामा

शुरुआत ही इतनी हंगामेदार देखकर मैं हैरान रह गया। कमरे में खड़ी लड़कियों के चेहरे पर जो आश्चर्य था, वो साफ़ दिख रहा था। नायक की घबराहट देखकर लगता है कोई बड़ी गलतफहमी हुई है। वैद्य भी, योद्धा भी जैसे ड्रामे में ऐसे मोड़ आम हैं। नेटशॉर्ट पर देखने का अनुभव काफी रोमांचक रहा। मुझे यह बहुत पसंद आया।

तनाव से भरा दृश्य

बेडरूम वाले दृश्य में तनाव साफ़ महसूस हुआ। काले कपड़ों वाली पात्र का रवैया बाकियों से बिल्कुल अलग था। सुरक्षा गार्ड के साथ बाहर की बहस ने कहानी को नया मोड़ दिया। मुझे यह लड़ाई बहुत पसंद आई। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में यह पल महत्वपूर्ण है। देखने में मज़ा आया।

अभिनेता की शानदार एक्टिंग

अभिनेता की एक्टिंग ने दिल जीत लिया। जब वह सुरक्षा गार्ड से बात कर रहा था, तो उसकी आवाज़ में गुस्सा साफ़ था। इमारत के बाहर का दृश्य बहुत अच्छी तरह फिल्माया गया था। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में यह पल महत्वपूर्ण है। मुझे यह शैली बहुत पसंद आई। बहुत अच्छा लगा।

कपड़े और मेकअप

लड़कियों के कपड़े और मेकअप बहुत आकर्षक थे। गुलाबी गाउन वाली का चेहरा भावनाओं से भरा था। कहानी में यह मोड़ दर्शकों को बांधे रखता है। मुझे यह शैली बहुत पसंद आई और मैं आगे क्या होगा जानना चाहता हूं। वैद्य भी, योद्धा भी का जादू चल रहा है। सब देखें।

सुरक्षा गार्ड का रवैया

सुरक्षा गार्ड की वर्दी और उसका रवैया बहुत असली लगा। मुख्य किरदार को अंदर जाने से रोका जाना एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे संघर्ष देखने को मिलते हैं। यह दृश्य बहुत प्रभावशाली था। मुझे अच्छा लगा। जरूर देखें।

बारीक विवरण

कमरे में जूते बिखरे होने का विवरण बहुत बारीक था। इससे लगता है कि कोई जल्दबाजी हुई थी। नायक की उलझन दर्शकों को भी उलझन में डालती है। मुझे यह रहस्य बहुत पसंद आया। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे संकेत मिलते हैं। कहानी अच्छी है।

बाहर का नज़ारा

बाहर के दृश्य में पेड़ और इमारत का नज़ारा सुंदर था। काले जैकेट वाला किरदार बहुत आत्मविश्वासी लग रहा था। सुरक्षा गार्ड से उसकी बहस ने कहानी में जान डाल दी। वैद्य भी, योद्धा भी का यह एपिसोड शानदार है। मुझे बहुत मज़ा आया। सबको पसंद आएगा।

खामोशी का शोर

लड़कियों की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। उनकी आंखों में सवाल थे जो पूछे नहीं गए। यह बिना संवाद के तनाव बनाना बड़ी कला है। मुझे यह तकनीक बहुत पसंद आई और मैं हैरान हूं। वैद्य भी, योद्धा भी की प्रस्तुति अद्भुत है। बहुत पसंद आया।

तेज़ रफ़्तार कहानी

कहानी की रफ़्तार बहुत तेज़ है। एक दृश्य से दूसरे दृश्य में संक्रमण बहुत सहज था। बेडरूम से कार्यालय इमारत तक का सफर दिलचस्प था। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसा पैसिंग देखकर मज़ा आया। मुझे और देखना है। कहानी बहुत रोचक है।

असली लड़ाई की शुरुआत

अंत में सुरक्षा गार्ड का चेहरा देखकर लगता है कि असली लड़ाई अब शुरू होगी। नायक की मुस्कान में एक चालाकी थी। यह ड्रामा दर्शकों को बांधे रखने में सफल है। मुझे अगला एपिसोड देखने की जल्दी है। वैद्य भी, योद्धा भी बेहतरीन है। सब देखें।