इस दृश्य में मुख्य पात्र का आत्मविश्वास देखने लायक है। वह साधारण वर्दी में भी किसी राजा की तरह चलता है। जब उसके सहकर्मी उसे सिगरेट जलाकर देते हैं, तो लगता है कि वे उसका सम्मान करते हैं। वैद्य भी, योद्धा भी नामक इस शो में ऐसे कई मोड़ हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। दीवार के पीछे छिपी महिला की रहस्यमयी मुस्कान ने कहानी में नया मोड़ जोड़ दिया है।
सुरक्षा गार्ड के बीच की दोस्ती बहुत ही स्वाभाविक लगती है। वे एक दूसरे का मजाक उड़ाते हैं लेकिन मुश्किल समय में साथ खड़े रहते हैं। मुख्य किरदार का प्रदर्शन बहुत प्रभावशाली है। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक है जो बताती है कि वह साधारण नहीं है। इस श्रृंखला की कहानी धीरे धीरे खुल रही है और हर कड़ी नई जानकारी देती है। वैद्य भी, योद्धा भी का हर पल रोमांचक है।
हल्के रंग के कपड़े वाली महिला क्यों छिप रही थी? यह सवाल दर्शकों के मन में उठना लाजिमी है। शायद वह मुख्य पात्र को जानती है या कोई गुप्त योजना बना रही है। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में ऐसे सस्पेंस बहुत हैं। दृश्य की रोशनी और पृष्ठभूमि बहुत अच्छी है। कलाकारों के अभिनय में प्राकृतिकता है जो इसे असली लगने देती है। हल्के रंग के कपड़े ने उसको अलग दिखाया।
अक्सर हम सोचते हैं कि वर्दी पहनने वाला साधारण है, लेकिन यहां कहानी कुछ और ही कहती है। मुख्य पात्र के हाव भाव बताते हैं कि वह किसी बड़े पद पर है। उसके सहयोगी भी उसे विशेष नजरों से देखते हैं। सिगरेट जलाने का दृश्य बहुत शानदार था। इस शो को देखते समय समय का पता नहीं चलता। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे कई चौंकाने वाले पल हैं जो कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
स्लेटी रंग के कपड़े वाली महिला और काले रंग के परिधान वाली महिला के बीच का अंतर स्पष्ट है। एक गंभीर है तो दूसरी चंचल। मुख्य पात्र दोनों के साथ अलग तरह से पेश आता है। वैद्य भी, योद्धा भी में महिला किरदारों को भी अच्छी तरह लिखा गया है। उनकी मौजूदगी कहानी को आगे बढ़ाती है। संवाद कम हैं लेकिन आंखों से बहुत कुछ कहा गया है। यह शैली दर्शकों को पसंद आ रही है।
सुरक्षा गार्ड्स का समूह बहुत ही मजेदार है। वे एक दूसरे को चिढ़ाते हैं लेकिन एकता बनी रहती है। उनके संवाद हंसी पैदा करते हैं। यह दिखाता है कि काम के बीच भी वे कैसे खुश रहते हैं। ऐसे दृश्य दर्शकों को तनाव मुक्त करते हैं। कहानी की गति बिल्कुल सही है। वैद्य भी, योद्धा भी में हल्का फुल्का हास्य भी शामिल है जो माहौल को हल्का करता है और बोरियत नहीं होने देता।
जब मुख्य पात्र सिगरेट पीने की तैयारी करता है, तो माहौल बदल जाता है। उसके दोस्त तुरंत लाइटर लेकर आते हैं। यह छोटा सा विवरण बताता है कि समूह में उसका क्या महत्व है। वैद्य भी, योद्धा भी की निर्माण गुणवत्ता अच्छी है। कपड़े और मंच सजावट वास्तविक लगते हैं। हर झलक में एक कहानी छिपी है। निर्देशक ने बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया है जो सराहनीय है।
दीवार के पीछे से झांकती महिला की मुस्कान ने सबका ध्यान खींचा। वह क्या सोच रही है? क्या वह मुख्य पात्र की योजना का हिस्सा है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए दर्शक बेताब हैं। इस श्रृंखला में हर किरदार का अपना महत्व है। कोई भी दृश्य बेकार नहीं गया है। निर्देशक ने बारीकियों का ध्यान रखा है। वैद्य भी, योद्धा भी का यह अंदाज बहुत अनोखा और आकर्षक लगता है।
मुख्य पात्र और उसके सहकर्मियों के बीच का मेलजोल बहुत अच्छा है। वे एक दूसरे को अच्छे से जानते हैं। बिना बोले ही इशारों में बात हो जाती है। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे संवादहीन दृश्य बहुत प्रभावशाली हैं। अभिनय इतना सहज है कि लगता है कैमरा नहीं है। दर्शक खुद को उस माहौल में पाते हैं। यह कलाकारों की मेहनत का परिणाम है जो स्क्रीन पर दिखता है।
इस कड़ी के अंत में कई सवाल छोड़ दिए गए हैं। मुख्य पात्र आगे क्या करेगा? क्या वह महिला सामने आएगी? ये सस्पेंस अगले भाग को देखने के लिए मजबूर करते हैं। सुरक्षा गार्ड की वर्दी में हीरो का अवतार देखना रोमांचक है। कहानी में उतार चढ़ाव बना हुआ है। यह शो निराश नहीं करता। वैद्य भी, योद्धा भी के आगे के भागों के लिए दर्शक उत्सुक हैं।