फोन के पर्दे पर वो रकम देखकर मैं भी दंग रह गया। इतने करोड़ एक पल में दिखाई दिए। नीली स्वेटर वाली लड़की की आँखें फटी की फटी रह गईं। ये दृश्य वाकई दिलचस्प था। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे मोड़ उम्मीद से ज्यादा हैं। खाने की मेज पर बैठे हर शख्स का चेहरा देखने लायक था। असली अमीरी क्या होती है, ये बिना बोले समझ आ गया। बहुत ही शानदार सीन था।
बीज रंग का सूट पहने व्यक्ति का घमंड साफ झलक रहा था। वो उंगली उठाकर सबको डांट रहा था जैसे सब उसके नौकर हों। लेकिन कहानी में पलटवार जरूर होगा। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में ऐसा अहंकार हमेशा टूटता है। मेज पर बैठे बाकी लोगों की चुप्पी सब कुछ बता रही थी। आगे क्या होगा ये देखने के लिए मैं बेताब हूं। अभिनय बहुत नेचुरल लगा।
हरे रंग की पोशाक वाली महिला का रवैया काफी घमंडी लग रहा था। बांहें मोड़कर खड़ी होना उसकी अकड़ दिखा रहा था। लेकिन जब असली मालकिन आएंगी तो सब पता चलेगा। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे किरदार अक्सर सबक सीखते हैं। डायनिंग रूम का माहौल बहुत तनावपूर्ण था। हर कोई किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था। बिल्कुल थिएटर जैसा अनुभव मिला।
अंत में वो महिला की एंट्री ने सबका ध्यान खींच लिया। काले रंग की पोशाक और साथ में नौकर तोहफे लिए खड़े थे। ये दिखावा था या असली ताकत, ये तो वक्त बताएगा। वैद्य भी, योद्धा भी का ये अंत का दृश्य बहुत धमाकेदार था। मेज पर बैठे लोगों के चेहरे के भाव बदल गए। अब असली खेल शुरू होने वाला है। मुझे ये क्रम बहुत पसंद आया।
काले जैकेट वाले लड़के की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। वो बस देख रहा था जैसे सब कुछ पहले से जानता हो। शायद वो ही असली नायक हो। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे शांत किरदार अक्सर खेल पलट देते हैं। वाइन का गिलास और खाने की मेज सब कुछ अमीरी दिखा रहा था। लेकिन असली दौलत इंसान के व्यवहार में होती है। बहुत गहरा संदेश मिला।
फोन में दिखे नंबर असली थे या नकली, ये तो पता नहीं। लेकिन प्रतिक्रिया देखकर लगा सब सच है। तीस करोड़ का लेनदेन कोई मजाक नहीं होता। वैद्य भी, योद्धा भी में पैसों का खेल बहुत तेजी से चल रहा है। नीली कार्डिगन वाली लड़की हैरान होकर फोन देख रही थी। ऐसे सीन देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कहानी में बहुत दम है।
कमरे की सजावट और छत की डिजाइन बहुत शानदार थी। लग रहा था किसी महल में बैठे हैं। पात्रों के कपड़े भी काफी कीमती लग रहे थे। वैद्य भी, योद्धा भी की निर्माण गुणवत्ता बहुत अच्छी है। बीज सूट वाले व्यक्ति की आवाज में गुस्सा साफ सुनाई दे रहा था। माहौल में तनाव को महसूस किया जा सकता था। देखने वालों को ये बहुत पसंद आएगा।
जब वो व्यक्ति उंगली उठाकर बात कर रहा था तो लगा वो सबको धमका रहा है। लेकिन सामने वाले चुपचाप सब सह रहे थे। शायद कोई बड़ी योजना चल रही हो। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे मोड़ बारबार आते हैं। सफेद जैकेट वाले व्यक्ति का चेहरा भी काफी गंभीर था। हर किसी के चेहरे पर सवाल थे। जवाब जल्द मिलने वाले हैं।
गुलाबी सूट वाली लड़की काफी डरी हुई लग रही थी। उसकी आँखों में आंसू थे जैसे कोई बड़ी गलती हो गई हो। बेचारी क्या करेगी अब। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे भावुक दृश्य दिल को छू लेते हैं। मेज पर खाना रखा था लेकिन किसी का ध्यान नहीं था। सबकी नजरें एक दूसरे पर थीं। नाटक बहुत ही जबरदस्त तरीके से बनाया गया है।
नौकरों का आना और तोहफे रखना ये साबित करता है कि असली ताकतवर कौन है। वो महिला बहुत शांत और गंभीर लग रही थी। उसकी चाल में रौब था। वैद्य भी, योद्धा भी की ये कड़ी सबसे बेहतरीन है। बाकी सब खड़े होकर उसे देख रहे थे। अब कहानी में बड़ा मोड़ आने वाला है। मैं अगला भाग देखने के लिए तैयार हूं।