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वैद्य भी, योद्धा भीवां52एपिसोड

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वैद्य भी, योद्धा भी

परम योद्धा आरव सिंह अपने शुद्ध तेज शरीर के कारण नींव स्तर के शिखर पर अटका था। उसके गुरु साधक ने उसे उस लड़की को खोजने का आदेश दिया जिसके शरीर पर "रहस्यमयी निशान" हो, ताकि वह अपनी रुकावट तोड़ सके। गुरु ने उसकी गुरु बहनों को भी मदद करने भेजा। पहाड़ से उतरने की उसी रात, आरव की मुलाकात चंद्र ग्रुप की सीईओ तारा चंद्र से हुई। वह उसका बॉयफ्रेंड बन गया और उसकी सहेलियों की रक्षा करने लगा। अपनी चिकित्सा और युद्ध कला के दम पर, आरव ने दुश्मनों को मुँह की खाई और जिंदगी की सबसे ऊँची सीढ़ी पर पहुँच गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

मानसी की खामोश साजिश

मानसी के चेहरे पर वो खामोश मुस्कान देखकर लगता है कि कोई बहुत बड़ी साजिश धीरे धीरे रची जा रही है। कार्यालय में अकेले बैठकर फोन देखना और फिर बाहर इतना बड़ा हंगामा होना, यह कहानी बहुत ही रोचक मोड़ ले रही है। वैद्य भी, योद्धा भी में हर किरदार की अपनी एक अलग और मजबूत पहचान है जो दर्शकों को पसंद आ रही है। हिमांशु भाटी का गुस्सा और उनका अंदाज साफ दिखाई दे रहा था कि वे क्या चाहते हैं। आगे क्या होगा यह जानने के लिए मैं बहुत ज्यादा बेताब हूं और इंतजार नहीं कर सकता। नेटशॉर्ट ऐप पर यह शो देखने का अनुभव काफी अच्छा और रोमांचक रहा है। मुझे लगता है कि यह शो आगे बहुत बड़ा धमाका करेगा।

टूटे हाथ का सब्र

बाहर खड़े उस व्यक्ति जिसका हाथ पट्टी में बंधा हुआ है, उसकी हालत देखकर तरस आ रहा है कि वह कैसे खड़ा है। फिर भी वह वहीं चुपचाप खड़ा रहा, इसमें बहुत हिम्मत और सब्र चाहिए होता है। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में संघर्ष और दर्द बहुत गहराई से दिखाया गया है जो दिल को छूता है। सफेद कपड़ों वाला व्यक्ति बहुत प्रभावशाली और ताकतवर लग रहा था सबके बीच में। भीड़ जमा होना और फिर अचानक वह धक्का लगना, सब कुछ बहुत तेजी से और झटके से हुआ। मुझे यह नाटक बहुत पसंद आ रहा है और मैं हर कड़ी का बेसब्री से इंतजार करता हूं। कहानी में बहुत गहराई है जो दिख रही है।

हिमांशु का रौब

हिमांशु भाटी ने जो अंदाज और रौब दिखाया, वह किसी खलनायक से कम नहीं था और सब पर भारी पड़ रहा था। उदय समूह के उपाध्यक्ष होने का घमंड साफ झलक रहा था उनकी आंखों और बातों में। वैद्य भी, योद्धा भी में सत्ता का खेल और राजनीति बहुत अच्छे से और बारीकी से दिखाया गया है। नीली पोशाक वाले को जोर से जमीन पर गिरता देख बहुत बड़ा झटका लगा और सब हैरान रह गए। ऐसे मोड़ कहानी को और दिलचस्प बनाते हैं और दर्शकों को बांधे रखते हैं। मुझे लगता है कि मानसी इस सबके पीछे की मुख्य वजह हो सकती है और सब जानती है।

फोन का संकेत

शुरुआत में मानसी का फोन चेक करना और फिर बाहर का हंगामा, यह संबंध बहुत गहरा और अजीब लग रहा है। समय बारह बजकर छियालीस मिनट दिखा था, शायद यह कोई खास संकेत या वजह है। वैद्य भी, योद्धा भी में छोटी छोटी चीजों का ध्यान रखा गया है जो कहानी को असली बनाता है। काले कोट वाले लड़के का प्रवेश भी बहुत दमदार और ताकतवर था सबके सामने। मैं अगली कड़ी का इंतजार नहीं कर सकता कि आगे क्या खुलासा होता है। यह शो देखने में बहुत मजा आ रहा है और कहानी बहुत तेज है।

तनावपूर्ण माहौल

जूनलिन समूह के बाहर का यह दृश्य बहुत तनावपूर्ण और डरावना था सबके लिए। सब लोग एक दूसरे को घूर रहे थे और माहौल खराब होता जा रहा था धीरे धीरे। वैद्य भी, योद्धा भी में कार्रवाई और नाटक का अच्छा मिश्रण है जो बिल्कुल सही लगा। उस व्यक्ति को जो धक्का लगा, वह दर्दनाक लग रहा था और सब चुप हो गए। भीड़ का इकठ्ठा होना दिखाता है कि यह मामला बहुत बड़ा और गंभीर है। कहानी बहुत तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है और हर पल नया होता है।

सफेद पोशाक की ताकत

सफेद पोशाक पहने व्यक्ति की बात सुनकर सब चुप हो गए, इससे उसकी ताकत का अंदाजा लगता है। वैद्य भी, योद्धा भी में किरदारों की हैसियत और रूतबा बहुत अच्छे से दिखाई गई है। हिमांशु भाटी की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था कि वे कुछ भी कर सकते हैं। यह कहानी सिर्फ व्यापार नहीं बल्कि बदले की भी लग रही है बहुत ज्यादा। मुझे यह शो बहुत पसंद आ रहा है और मैं इसे सबको सुझाऊंगा जरूर। हर सीन में कुछ नया है जो पुराना नहीं लगता बिल्कुल भी।

शोर और खामोशी

मानसी की खामोशी और बाहर का शोर, यह विरोधाभास बहुत अच्छा लगा और अलग लगा। कार्यालय के अंदर और बाहर की दुनिया बिल्कुल अलग लग रही थी और विचित्र थी। वैद्य भी, योद्धा भी में दृश्य कथा कहना बहुत मजबूत और असरदार है। काले कपड़ों वाले ने जो किया, वह उम्मीद नहीं थी किसी को भी। हर सीन में कुछ नया होता है जो दर्शकों को बांधे रखता है और मजा देता है। यह लघु नाटक बहुत ही शानदार और बेहतरीन है सबके लिए।

चुप क्यों था वह

टूटे हुए हाथ वाला लड़का क्यों चुप था, यह सवाल दिमाग में आ रहा है बार बार। शायद उसे कुछ पता था या वह मजबूर था कुछ करने से। वैद्य भी, योद्धा भी में हर किरदार के पीछे एक राज छिपा हुआ है। भीड़ में खड़े लोगों के चेहरे भी काफी हैरान और डरे हुए थे। यह कहानी बहुत पेचीदा होती जा रही है और सुलझ नहीं रही है। मुझे लगता है कि आरव सिंह का नाम फिर से आएगा और सब बदलेगा।

जमीन पर गिरा वह

वह धक्का इतना जोर से था कि व्यक्ति सीधा जमीन पर गिर गया और तड़पने लगा। सब लोग हैरान रह गए और कोई मदद को आगे नहीं आया डर के मारे। वैद्य भी, योद्धा भी में कार्रवाई के दृश्य बहुत यथार्थवादी और असली हैं। हिमांशु भाटी का इशारा करना दिखाता है कि असली खिलाड़ी कौन है। कहानी में रहस्य बना हुआ है जो बहुत अच्छा और रोमांचक है। मैं अगला भाग देखने के लिए तैयार हूं और उत्सुक हूं।

आगे क्या होगा

अंत में जो आगे की कहानी जारी रहेगी आया, उसने और भी उत्सुकता बढ़ा दी सबमें। अब पता नहीं मानसी का क्या भूमिका होगी इस सब में और कैसे आएगी। वैद्य भी, योद्धा भी की हर कड़ी नया रहस्य लेकर आती है। बाहर का माहौल और अंदर की साजिशें मिलकर एक तूफान खड़ा कर रही हैं। यह शो देखने में बहुत मजा आ रहा है और समय अच्छा कटता है। नेटशॉर्ट पर यह सबसे बेहतरीन श्रृंखला है जो मैंने देखी है।