सुबह की शुरुआत ही इतनी तनावपूर्ण देखकर हैरानी हुई। बिस्तर पर दोनों के बीच की खामोशी कुछ कहानी कह रही है। लड़की की शर्मीली हरकतें और लड़के का बेफिक्र अंदाज बिल्कुल अलग है। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसा लगता है कि रात कुछ खास हुआ था। क्या वो सच में एक दूसरे को जानते हैं? यह रहस्य बना हुआ है।
छत पर स्नाइपर लेकर बैठे उस लड़की का रूप बहुत खतरनाक था। चमड़े का जैकेट और ठंडा मिजाज बिल्कुल किसी जासूस जैसा लग रहा था। जब गोली चलती है तो घबराहट अपने चरम पर पहुंच जाती है। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में कारवाई का यह अंदाज नया लगा। क्या वो किसी को मारने आई थी या बचाने?
चीते के निशान वाली पोशाक वाली लड़की के आगमन ने सब बदल दिया। गौरी शर्मा का अंदाज बहुत निडर और आत्मविश्वास से भरा था। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी जब वो कमरे में आई। वैद्य भी, योद्धा भी में प्रेम त्रिकोण के संकेत मिल रहे हैं। अब कहानी किस मोड़ पर जाएगी देखना दिलचस्प होगा।
बाथरूम वाला दृश्य काफी भावुक और प्रेम भरा था। फिसलने के बाद लड़के ने उसे संभाला, उस पल का लगाव बहुत प्यारा लगा। तौलिये में लिपटी वो लड़की बहुत मासूम लग रही थी। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे पल दर्शकों को बांधे रखते हैं। क्या यह प्यार है या कोई साजिश? समझना मुश्किल है।
कहानी में बार बार मोड़ आ रहे हैं। कभी प्रेम तो कभी कारवाई। बिस्तर से लेकर छत तक का सफर बहुत तेज रफ्तार है। वैद्य भी, योद्धा भी के हर भाग में कुछ नया मिल रहा है। पात्रों के बीच की उलझन दर्शकों को भी उलझन में डाल रही है। आगे क्या होगा इसका इंतजार है।
मुख्य किरदार की बहुमुखी प्रतिभा देखने लायक है। वो कभी प्रेमी बनता है तो कभी खतरे में घिरा हुआ लगता है। उसके चेहरे के भाव बहुत गहरे हैं। वैद्य भी, योद्धा भी में किरदारों की गहराई को अच्छे से दिखाया गया है। हर किसी के पास कोई न कोई राज छिपा है।
दृश्य और छायांकन बहुत शानदार है। बेडरूम की रोशनी से लेकर बाहर का नज़ारा सब कुछ सुंदर लग रहा था। वैद्य भी, योद्धा भी की निर्माण गुणवत्ता ने प्रभावित किया। रंगों का इस्तेमाल मूड के हिसाब से बदलता रहता है। देखने में बहुत आंखों को सुकून मिलता है।
रहस्य बनाए रखने का तरीका बहुत अच्छा है। गोली चलने के बाद भी साफ नहीं हुआ कि निशाना किस पर था। खिलौना टूट गया पर जान बच गई। वैद्य भी, योद्धा भी में खतरे का साया हमेशा बना रहता है। दर्शक हर पल चौकन्ने रहते हैं कि अगला वार कब होगा।
महिला किरदारों की मजबूती इस कहानी की जान है। चाहे वो स्नाइपर हो या घर वाली लड़की, दोनों में दम है। वैद्य भी, योद्धा भी में नारी शक्ति को अच्छे से दिखाया गया है। उनकी चुप्पी भी शोर मचा रही है। ऐसी कहानियां आज के समय में जरूरी हैं।
कुल मिलाकर यह शो एक रोमांचक सफर है। भावना और कारवाई का संतुलन बिल्कुल सही है। वैद्य भी, योद्धा भी को देखने के बाद मन में कई सवाल उठ रहे हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसी सामग्री मिलना अच्छा लगता है। कहानी आगे बढ़ने के साथ और दिलचस्प होगी।