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वैद्य भी, योद्धा भीवां40एपिसोड

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वैद्य भी, योद्धा भी

परम योद्धा आरव सिंह अपने शुद्ध तेज शरीर के कारण नींव स्तर के शिखर पर अटका था। उसके गुरु साधक ने उसे उस लड़की को खोजने का आदेश दिया जिसके शरीर पर "रहस्यमयी निशान" हो, ताकि वह अपनी रुकावट तोड़ सके। गुरु ने उसकी गुरु बहनों को भी मदद करने भेजा। पहाड़ से उतरने की उसी रात, आरव की मुलाकात चंद्र ग्रुप की सीईओ तारा चंद्र से हुई। वह उसका बॉयफ्रेंड बन गया और उसकी सहेलियों की रक्षा करने लगा। अपनी चिकित्सा और युद्ध कला के दम पर, आरव ने दुश्मनों को मुँह की खाई और जिंदगी की सबसे ऊँची सीढ़ी पर पहुँच गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

गुस्से का नतीजा

इस दृश्य में तनाव साफ़ दिख रहा है। मूंछों वाला व्यक्ति बहुत घमंडी लग रहा था, लेकिन अंत में उसे ही दर्द हुआ। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे पल बहुत आते हैं। सफेद जैकेट वाला शांत खड़ा था, जैसे उसे सब पता हो। बीज रंग का सूट पहने युवक बेचारा जमीन पर गिर गया। उसे बहुत चोट लगी है।

बदलाव की घड़ी

कहानी में ट्विस्ट देखकर मज़ा आ गया। पहले सब झुक रहे थे, फिर अचानक मारपीट शुरू हो गई। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी बहुत रोचक है। युवतियां हैरान होकर देख रही थीं। जो इंसान कुर्सी पर बैठा था, उसकी चाल कुछ अलग ही लग रही थी। अंत में मूंछों वाले को पेट में दर्द हुआ। सब हैरान हैं।

ताकत का घमंड

ताकत के नशे में चूर व्यक्ति हमेशा गिरता है। यहाँ भी वही हुआ। वैद्य भी, योद्धा भी में न्याय की जीत होती है। बीज रंग का सूट वाला चिल्ला रहा था, पर किसी ने नहीं सुना। सफेद जैकेट वाले की आँखों में गुस्सा साफ़ दिख रहा था। बहुत बढ़िया एक्टिंग है। सब देख रहे हैं।

चुप्पी का शोर

जो इंसान कम बोलता है, वही ज्यादा खतरनाक होता है। सफेद जैकेट वाला बिल्कुल चुप था। वैद्य भी, योद्धा भी का यह सीन दिलचस्प है। मूंछों वाले ने सोचा था वह जीत गया, लेकिन उसकी गलतफहमी थी। कमरे का माहौल बहुत भारी लग रहा था। दीवारें साक्षी हैं।

धोखे का खेल

लगता है कोई बड़ा षड्यंत्र रचा गया था। सब लोग एक दूसरे को शक की नज़र से देख रहे थे। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे मोड़ आते रहते हैं। जमीन पर गिरा हुआ लड़का दर्द से कराह रहा था। मूंछों वाला व्यक्ति अचानक क्यों दर्द में बिलबिला उठा? कोई जादू है।

सम्मान की लड़ाई

झुकने से इंसान छोटा नहीं होता, पर यहाँ झुकना मजबूरी थी। वैद्य भी, योद्धा भी में सम्मान की बात होती है। सभी काले कपड़े वाले व्यक्ति एक तरफ खड़े थे। बीच में खड़ी युवतियां डरी हुई लग रही थीं। एक्शन सीन बहुत तेज़ी से हुआ। सांसें रुक गईं।

अंत की शुरुआत

यह अंत नहीं, बस शुरुआत लग रही है। मूंछों वाला व्यक्ति पकड़ लिया गया है। वैद्य भी, योद्धा भी का क्लाइमेक्स पास आ गया है। सफेद जैकेट वाले ने बिना हाथ लगाए सब बदल दिया। बीज रंग का सूट वाला अब क्या करेगा? देखना बाकी है। मज़ा आएगा।

भावनाओं का खेल

चेहरे के हावभाव देखकर सब समझ आ जाता है। डर, गुस्सा, हैरानी सब कुछ था। वैद्य भी, योद्धा भी में भावनाएं सच्ची लगती हैं। जब वह लड़का गिरा, तो सबकी सांसें रुक गईं। कमरे की सजावट भी बहुत अमीराना लग रही थी। फूल भी थे।

सच्चाई का सामना

झूठ ज्यादा देर नहीं टिकता, सच्चाई सामने आ ही जाती है। वैद्य भी, योद्धा भी में यही संदेश है। मूंछों वाले के चेहरे पर डर साफ़ दिख रहा था जब उसे दर्द हुआ। सफेद जैकेट वाला ही असली हीरो लग रहा है इस कहानी में। सब मान गए।

रोमांचक सफर

हर सीन के बाद नया रोमांच बढ़ता जाता है। वैद्य भी, योद्धा भी देखने में बहुत मज़ा आ रहा है। जो इंसान जमीन पर था, वह फिर उठने की कोशिश कर रहा था। मूंछों वाला व्यक्ति अब कमजोर पड़ गया है। अगला एपिसोड कब आएगा? इंतज़ार है।