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वैद्य भी, योद्धा भीवां4एपिसोड

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वैद्य भी, योद्धा भी

परम योद्धा आरव सिंह अपने शुद्ध तेज शरीर के कारण नींव स्तर के शिखर पर अटका था। उसके गुरु साधक ने उसे उस लड़की को खोजने का आदेश दिया जिसके शरीर पर "रहस्यमयी निशान" हो, ताकि वह अपनी रुकावट तोड़ सके। गुरु ने उसकी गुरु बहनों को भी मदद करने भेजा। पहाड़ से उतरने की उसी रात, आरव की मुलाकात चंद्र ग्रुप की सीईओ तारा चंद्र से हुई। वह उसका बॉयफ्रेंड बन गया और उसकी सहेलियों की रक्षा करने लगा। अपनी चिकित्सा और युद्ध कला के दम पर, आरव ने दुश्मनों को मुँह की खाई और जिंदगी की सबसे ऊँची सीढ़ी पर पहुँच गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

घमंड का अंत

नीले सूट वाले का घमंड देखकर बहुत गुस्सा आ रहा था, लेकिन जब हल्के रंग की जैकेट वाले ने पलटवार किया तो सच में मज़ा आ गया। इस शो वैद्य भी, योद्धा भी में लड़ाई के दृश्य बहुत जबरदस्त हैं और हर डायलॉग में दम है। अभिनय भी लाजवाब है और कहानी में नयापन है। नेटशॉर्ट ऍप पर देखने का अनुभव भी अच्छा रहा।

शांत नायक की ताकत

शांत बैठे नायक की ताकत को कोई भी नहीं आंक सकता था जब तक उसने अपनी शक्ति नहीं दिखाई। सब हैरान रह गए जब उसने वार किया। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में यह मोड़ बहुत रोमांचक था और गुंडों की हालत खराब हो गई। यह दृश्य बहुत यादगार बन गया है।

लड़की की चिंता

काली ड्रेस वाली लड़की की चिंता साफ़ तौर पर दिख रही थी क्योंकि खलनायक की हरकतें हद से बढ़ गई थीं। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं और अंत में जीत नायक की हुई। दर्शक भी इससे खुश हैं।

माहौल बदल गया

लड़ाई की शुरुआत होते ही पूरा माहौल बदल गया और नीले सूट वाले को अपनी गलती का अहसास हो गया। वैद्य भी, योद्धा भी का यह कड़ी बहुत जबरदस्त है और विशेष प्रभाव भी काफी अच्छे लगे। तकनीकी पक्ष भी मज़बूत है।

अंगरक्षक हार गए

अंगरक्षक भी कुछ नहीं कर पाए जब नायक ने वार किया और सब जमीन पर गिरते हुए दिखाई दिए। वैद्य भी, योद्धा भी में शक्ति संतुलन बहुत अच्छे दिखाए गए हैं और देखने में बहुत मज़ा आया। हर पल रोमांच से भरा है।

स्वाभाविक प्रतिक्रिया

नीली टॉप वाली लड़की की प्रतिक्रिया बहुत स्वाभाविक थी क्योंकि खतरे को भांपना आसान था। वैद्य भी, योद्धा भी की पटकथा में हर किरदार का महत्व है और कहानी आगे बढ़ती जा रही है। अगला भाग कब आएगा।

अहंकार का सबक

अहंकार का अंत हमेशा बुरा होता है, यह सबक यहाँ बहुत अच्छे से मिलता है। नायक ने बिना शोर मचाए सबको सबक सिखाया। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे संदेश भी हैं और लड़ाई के साथ इमोशन भी है। परिवार के साथ देख सकते हैं।

तेज़ रफ़्तार

कमरे का माहौल बहुत तनावपूर्ण था शुरू में फिर अचानक लड़ाई शुरू हो गया। वैद्य भी, योद्धा भी की रफ़्तार बहुत तेज़ है और एक पल भी बोरियत नहीं होती। बिल्कुल पकड़ बनाए रखती है। समय का पता नहीं चलता।

आत्मविश्वास की जीत

नायक की आँखों में आत्मविश्वास साफ़ तौर पर दिख रहा था जबकि खलनायक सिर्फ दिखावा कर रहा था। वैद्य भी, योद्धा भी में किरदारों की गहराई अच्छी है और यह कहानी मुझे बहुत पसंद आ रही है। दोस्तों को भी बताऊंगा।

शानदार बनावट

लड़ाई का दृश्य लड़ाई की बनावट बहुत शानदार है और हवा में उड़ते हुए गुंडे देखकर मज़ा आया। वैद्य भी, योद्धा भी का निर्माण स्तर उच्च है और ऐसे ही और कड़ियों का इंतज़ार रहेगा। निर्माता को सलाम।