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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां9एपिसोड

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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
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इस एपिसोड की समीक्षा

गुंडों का घमंड टूटा

जब फूलों वाली शर्ट वाला शख्स उस महिला के साथ बदतमीजी कर रहा था, तो बहुत गुस्सा आ रहा था। लेकिन जैसे ही ग्रे जैकेट वाला नायक वहां आया, सबका मजा आ गया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत सीरीज में ऐसे दृश्य दिल जोर से धड़का देते हैं। काश हर जगह ऐसा इंसाफ मिले। एक्टिंग बहुत नेचुरल लगी। मुझे यह पसंद आया।

घुटनों पर बैठे शख्स की दर्दनाक चीख

चश्मे वाला शख्स जब जमीन पर बैठकर भीख मांग रहा था, तो दिल बहुत पसीज गया। हरे सूट वाले का अहंकार देखकर लगता था कि अब कोई नहीं बचाएगा। पर कहानी में ट्विस्ट वही अच्छा लगता है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में दिखाया गया है कि ताकतवर हमेशा नहीं जीतते। बहुत इमोशनल दृश्य था। देखकर रोना आ गया।

हीरो की एंट्री ने बदल दी कहानी

सड़क पर पड़े हुए गुंडों को देखकर लगा कि अब मजा आएगा। ग्रे जैकेट वाले की चाल और आंखों का गुस्सा लाजवाब था। हरे सूट वाले के चेहरे का रंग उतर गया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत जैसे शो में ऐसे क्लाइमेक्स की उम्मीद होती है। एक्शन दृश्य बहुत स्मूथ थे। मुझे यह बहुत पसंद आया।

विलेन की हद से बढ़ी गलती

फूलों वाली शर्ट वाले को लगा वो सब कुछ खरीद सकता है। उसने महिला का हाथ पकड़कर बहुत बड़ी गलती कर दी। ऐसे किरदारों को सबक मिलना जरूरी है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी में यही दिखाया गया है कि बुराई का अंत बुरा होता है। डायलॉग डिलीवरी बहुत दमदार थी। सबको देखना चाहिए।

महिला का संघर्ष और हिम्मत

काले चमड़े का कोट पहनी महिला डरी हुई थी लेकिन उसने हार नहीं मानी। जब उसने खलनायक को धक्का दिया, तो लगा कि वो अकेली नहीं है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में महिला किरदारों को मजबूत दिखाया गया है। यह देखकर अच्छा लगा कि वो चुप नहीं बैठी। बहुत प्रेरणादायक है।

हरे सूट वाले का अहंकार चूर

शुरू में हरे सूट वाला बहुत कॉन्फिडेंट लग रहा था। उसे लगा उसकी ताकत सब पर भारी है। लेकिन नायक की एंट्री ने सब बदल दिया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में खलनायक का डरना सबसे बेस्ट पार्ट था। ऐसे दृश्य बार बार देखने को मन करता है। बहुत रोमांचक था। सभी को पसंद आएगा।

सड़क का वो डरावना मंजर

जब कई लोग एक को पीट रहे थे, तो माहौल बहुत तनावपूर्ण था। लग रहा था कि अब कुछ नहीं हो सकता। पर कहानी में उम्मीद की किरण जरूर होती है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत ने दिखाया कि हिम्मत कैसे काम आती है। लोकेशन भी बहुत रियल लगी। मुझे यह पसंद आया। बहुत अच्छा लगा।

बदलाव की हवा चल पड़ी

नायक के आते ही माहौल बदल गया। गुंडे भागने की कोशिश कर रहे थे। फूलों वाली शर्ट वाले की हालत खराब हो गई। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे टर्निंग पॉइंट्स कहानी को आगे बढ़ाते हैं। मुझे यह ट्विस्ट बहुत पसंद आया। कहानी बहुत अच्छी है। सबको देखनी चाहिए।

दोस्ती और वफादारी की मिसाल

जो शख्स नीचे गिरा था, उसे बचाने के लिए नायक आया। यह दिखाता है कि मुसीबत में कौन काम आता है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में रिश्तों की अहमियत दिखाई गई है। ऐसे दृश्य दिल को छू लेते हैं। एक्टिंग में दम था। बहुत प्रभावशाली लगा। सबको पसंद आएगा।

अंत में मिली राहत

जब खलनायक को पकड़ लिया गया, तो सांस की सांस आई। लंबे समय से ऐसा अच्छा वीडियो देखा है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत ने निराश नहीं किया। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे शो देखना सुकून देता है। सबको देखना चाहिए। बहुत बढ़िया काम है। सभी को यह जरूर देखना चाहिए।