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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां43एपिसोड

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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
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इस एपिसोड की समीक्षा

घुटनों पर बैठ कर माफ़ी

सूट वाले आदमी की हालत देख कर दिल दुखी हो गया। उसने घुटनों पर बैठ कर माफ़ी मांगी। वेस्ट वाले ने शुरु में कड़ी नज़र से देखा पर बाद में उठाया। ये नाटक आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत का दृश्य बहुत भावुक था। सबका अभिनय ज़बरदस्त है। कमरे का माहौल भी तनावपूर्ण था। दर्शकों को ये पल बहुत पसंद आएगा। यहाँ रिश्तों की अहमियत दिखाई गई है।

पीछे खड़ी लड़कियों का रिएक्शन

पीछे खड़ी लड़कियों के चेहरे पर चिंता साफ़ दिख रही थी। उन्हें लगा शायद बात बिगड़ जाएगी। पर अंत में सब ठीक हो गया। इस कहानी में रिश्तों की गहराई है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत देखने का मज़ा अलग है। महिलाओं की चुप्पी भी कहानी कह रही थी। यारों की दोस्ती या परिवार का झगड़ा साफ़ नहीं हुआ। पर समाधान अच्छा लगा।

तनाव और सुलह का पल

शुरुआत में लगा लड़ाई होगी पर माफ़ी का दृश्य था। सूट वाले की आँखों में आंसू थे। वेस्ट वाले का गुस्सा पिघल गया। ये पल आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में बहुत यादगार बनेगा। दर्शक को पसंद आएगा। संगीत ने भी असर डाला। कैमरा कोण ने भावना पकड़ी। ये वेब श्रृंखला धीरे धीरे लोकप्रिय हो रही है। मुझे अगली कड़ी देखनी है।

बिना संवाद के अभिनय

बिना संवाद के भी भाव सब कुछ बता रहे हैं। हाथ पकड़ना और उठाना, ये भरोसा दिखाता है। नाटक का नाम आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत सही लगता है क्योंकि रिश्ते उलझते हैं पर सुलझ भी जाते हैं। कलाकारों ने मेहनत की है। रोशनी भी सही थी। साधारण कमरे में बड़ी कहानी कही गई। ये छोटा वीडियो बहुत प्रभावशाली है।

कमरे की सजावट

कमरे का सजावट सिंपल पर असरदार है। रोशनी और संगीत ने माहौल बनाया। घुटने टेकने वाला दृश्य भारी था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी रोचक लग रही है। आगे क्या होगा देखने को उत्सुक हूं। दीवार पर लगे चित्र भी अच्छे लगे। रंगों का चुनाव शांत था। ये दृश्य कथा का अच्छा उदाहरण है।

माफ़ी और बड़ा दिल

माफ़ी मांगना आसान नहीं होता, खास कर बड़े लोगों के लिए। सूट वाले ने अहंकार छोड़ा। वेस्ट वाले ने दिल बड़ा दिखाया। ये सीख आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत से मिलती है। बहुत प्रेरणादायक दृश्य था। समाज में भी ऐसा होना चाहिए। झगड़े भूल कर आगे बढ़ना चाहिए। ये वीडियो सबको देखना चाहिए। संदेश बहुत गहरा है।

चरमोत्कर्ष की ओर

जब वेस्ट वाले ने हाथ बढ़ाया, तब हल्की सी राहत मिली। पहले लगा वो माफ़ी नहीं देगा। मोड़ अच्छा था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे मोड़ उम्मीद कर सकते हैं। कहानी तेज़ रफ़्तार में है। बोरियत नहीं होती। हर दृश्य में कुछ नया है। संपादन भी सटीक है। दर्शक बंधे रहते हैं। ये गुणवत्ता सामग्री है।

कलाकारों का प्रदर्शन

कलाकारों ने अपने पात्र को न्याय दिया है। रोना और गुस्सा दोनों स्वाभाविक लगे। कैमरा कोण ने भावनाओं को कैद किया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की गुणवत्ता अच्छी है। देखने लायक है। आवाज़ की स्पष्टता भी अच्छी थी। पृष्ठभूमि ध्वनि सही था। तकनीकी पक्ष भी मज़बूत है। टीम को बधाई मिलनी चाहिए।

रिश्तों की कहानी

दो दोस्तों या भाइयों के बीच का झगड़ा लग रहा था। महिलाओं की चिंता ने दृश्य को गरम किया। अंत में मिलन हुआ। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत रिश्तों की कहानी है। दिल को छूने वाली सामग्री है। परिवार की अहमियत समझ आई। हमें भी अपने अपनों को संभालना चाहिए। ये वीडियो दिल पर असर करता है। बहुत प्यारा लगा।

गंभीर माहौल

पूरे दृश्य में एक गंभीरता थी। कोई हंसी मज़ाक नहीं, सिर्फ भावनाएं। ये गंभीर नाटक पसंद करने वालों के लिए है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की ये कड़ी हिट हो सकती है। मैं अगला भाग प्रतीक्षा करूंगा। किरदारों की वेशभूषा भी अच्छी थी। सूट और वेस्ट का मेल क्लासी था। कुल मिलाकर बेहतरीन अनुभव रहा।