कंटेनर वाले सीन में जो तनाव था वो कमाल का था। भूरे जैकेट वाले ने फोन उठाया तो सबकी सांसें रुक गईं। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे मोड़ देखकर मज़ा आ गया। चश्मे वाला भाई चुपचाप सब देख रहा था, जैसे कोई बड़ी योजना चल रही हो। रात का अंधेरा और कंटेनर का माहौल डरावना लग रहा था। ज़मीन पर बैठे शख्स की हालत देखकर तरस आया। हर कोई किसी बड़े रहस्य का हिस्सा लग रहा है। सब कुछ बहुत तेज़ी से बदल रहा था।
बुज़ुर्ग व्यक्ति की एंट्री बहुत रहस्यमयी थी। बैंगनी जैकेट में वो फोन पर बात कर रहे थे। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी में ये किरदार अहम लगता है। चाय की मेज और पुराना संगीत माहौल को शांत बना रहा था। लेकिन बाहर का सीन बिल्कुल उल्टा था। कंटेनर के पास जो हुआ वो सोचने पर मजबूर कर देता है। वहां का माहौल बहुत गंभीर था। सबको कुछ छुपाना था।
किराना स्टोर वाला सीन अचानक आया तो हैरानी हुई। दुकानदार के चेहरे पर डर साफ़ दिख रहा था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में लोकेशन बदलने की रफ़्तार तेज़ है। लेदर जैकेट वाली लड़की सामान देख रही थी। पीछे बैठी लड़की किताब पढ़ रही थी। फिर भूरे जैकेट वाला अंदर आया और माहौल बदल गया। सबकी नज़रें उस पर टिक गईं। कुछ बड़ा होने वाला था।
ज़मीन पर गिड़े हुए व्यक्ति की आँखों में खौफ था। चश्मे वाले ने इशारा किया और सब खत्म हो गया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में पावर डायनामिक्स बहुत दिलचस्प हैं। कौन किसका हुक्म मान रहा है, ये पता चलना मुश्किल है। रात के अंधेरे में ये खेल खतरनाक लग रहा था। कोई कुछ बोल नहीं रहा था। सब डरे हुए थे।
भूरे जैकेट वाले की एंट्री स्टोर में जैसे तूफ़ान लेकर आई। दुकानदार की आँखें फटी की फटी रह गईं। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में हर किरदार के चेहरे पर एक कहानी है। वो लड़की जो किताब पढ़ रही थी, वो भी अब चौंक गई है। लगता है ये मुलाकात पहले से तय थी। सब कुछ योजना के अनुसार हो रहा है। माहौल में बिजली कड़क रही थी।
फोन की घंटी बजते ही सबकी नज़रें उस पर टिक गईं। स्क्रीन पर नाम देखकर हैरानी हुई। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कहानी आगे बढ़ाता है। भूरे जैकेट वाले ने फोन काटा तो मुस्कुरा दिया। ये मुस्कान खतरनाक थी। चश्मे वाले ने भी राहत की सांस ली। माहौल में तनाव था। सब कुछ संदिग्ध लग रहा था।
स्टोर के अंदर की खामोशी बाहर के शोर से बिल्कुल अलग थी। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में कंट्रास्ट बहुत अच्छा दिखाया गया है। दुकानदार कुछ बोलना चाहता था पर रुक गया। लेदर जैकेट वाली लड़की ने पलटकर देखा। सबको अहसास हो गया कि कुछ गड़बड़ है। हवा में कुछ अलग था। सब डर रहे थे।
कंटेनर के पास जो लड़ाई हुई वो सीधे दिल पर असर करती है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में एक्शन से ज़्यादा इमोशन दिखाया गया है। गिड़े हुए व्यक्ति को उठाकर ले जाया गया। भूरे जैकेट वाले ने बिना कुछ कहे सब संभाल लिया। उसकी खामोशी सबसे ज़्यादा शोर मचा रही थी। सब हैरान थे। कोई कुछ समझ नहीं पा रहा था।
बुज़ुर्ग व्यक्ति के कमरे की सजावट बहुत पुरानी थी। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में पुराने और नए ज़माने का टकराव दिखता है। वो फोन पर हंस रहे थे फिर गंभीर हो गए। ये बदलाव बताता है कि खेल बड़ा है। दुकान वाले सीन में भी वही तनाव दिखी। माहौल भारी था। सब कुछ गहरा था।
आखिरी सीन में दुकानदार का चेहरा पीला पड़ गया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत का क्लाइमेक्स पास लग रहा है। भूरे जैकेट वाले ने दुकानदार को देखा और कुछ कहा। लेदर जैकेट वाली लड़की भी हैरान थी। अब आगे क्या होगा ये जानने की बेचैनी बढ़ गई है। सब इंतज़ार कर रहे हैं। कहानी बहुत आगे बढ़ गई है।