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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां30एपिसोड

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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
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इस एपिसोड की समीक्षा

जबरदस्त एक्शन सीन

ब्राउन जैकेट पहने व्यक्ति की लड़ाई का दृश्य बहुत ही शानदार था। उसने जिस फुर्ती से दुश्मनों को हराया, वह देखने लायक था। कंटेनर यार्ड का वातावरण काफी खतरनाक और रहस्यमयी लग रहा था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में एक्शन की कोरियोग्राफी बहुत बेहतरीन है। रात के समय की नीली रोशनी ने दृश्य में तनाव बढ़ा दिया था। मुझे यह पूरा सीन बहुत ज्यादा पसंद आया और मैं बारबार देख रहा हूँ।

सस्पेंस से भरी कहानी

शुरू में वे तीनों छिपकर सब कुछ चुपचाप देख रहे थे, फिर अचानक हमला कर दिया। ग्रे सूट वाले व्यक्ति की चालाकी और दिमाग देखने लायक था। वैन से बॉक्स उतारते समय स्क्रीन पर सस्पेंस बना रहा। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी में कई बड़े मोड़ हैं जो हैरान करते हैं। फोन पर बात करने वाले की घबराहट साफ दिख रही थी। अंत में सबूत मिलना चौंकाने वाला था।

टीम वर्क की मिसाल

चश्मे वाले आदमी ने जब कॉलर पकड़ा, तो डर लग रहा था। ब्राउन जैकेट वाला शांत लेकिन खतरनाक है। तीनों की टीम वर्क बेमिसाल है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में पात्रों के बीच की केमिस्ट्री बहुत अच्छी है। जमीन से पैकेट उठाना एक बड़ा संकेत था। मुझे यह ड्रामा बहुत पसंद आ रहा है और मैं इंतजार कर रहा हूँ।

माहौल और सेटिंग

नीली रोशनी और कंटेनर्स का सेट बहुत यूनिक है। रात के समय की शूटिंग ने रहस्य बढ़ा दिया। विलेन का घमंड टूटते हुए देखना सुकून देने वाला था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत का प्रोडक्शन वैल्यू अच्छा है। लड़ाई के दौरान कैमरा एंगल बहुत सही थे। हर पल में उत्सुकता बनी रहती है और कहानी आगे बढ़ती है।

अचानक हमला

मुझे लगा वे बस देखेंगे, लेकिन वे लड़ने कूद पड़े। विलेन को उम्मीद नहीं थी कि कोई आएगा। फोन कॉल के बाद सब बदल गया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में कभी बोरियत नहीं होती। सबूत का पैकेट गिरना कहानी का अहम हिस्सा था। एक्शन बहुत तेज और सटीक था। मुझे यह शैली बहुत पसंद आई।

न्याय की जीत

लाल शर्ट वाले को अपनी ताकत पर बहुत घमंड था। तीनों दोस्तों ने मिलकर उसे सबक सिखाया। उसकी आंखों में डर साफ दिख रहा था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में न्याय की जीत होती है। कंटेनर के अंदर का दृश्य बहुत तनावपूर्ण था। मुझे यह कहानी बहुत रोचक लगी और मैं आगे देखना चाहता हूँ।

दोस्ती की ताकत

तीन दोस्तों की दोस्ती और वफादारी देखने लायक है। एक ध्यान बंटाता है, दूसरा मारता है। ग्रे सूट वाला लीडर लग रहा था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में रिश्तों की अहमियत है। वैन से सामान उतरना किसी साजिश की तरफ इशारा था। अंत का क्लाइमेक्स बहुत दमदार था। सब कुछ बहुत अच्छा लगा।

तेज रफ्तार कहानी

कहानी की रफ्तार बहुत तेज है, कोई सीन बेकार नहीं है। छिपने से लेकर पकड़ने तक सब कुछ फट से हुआ। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की स्क्रिप्ट बहुत मजबूत है। जमीन पर गिरा हुआ पैकेट कहानी बदल सकता है। मुझे यह शो बहुत पसंद आया है। मैं इसे अपने दोस्तों को भी बताऊंगा।

विजुअल स्टोरीटेलिंग

बिना डायलॉग के भी एक्सप्रेशन सब बता रहे थे। ब्राउन जैकेट वाले की घूरने की शैली खतरनाक है। विलेन की घबराहट असली लग रही थी। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत विजुअल स्टोरीटेलिंग पर जोर देता है। रात के अंधेरे में चमकती रोशनी अच्छी लगी। यह एक बेहतरीन कलाकृति है।

सप्ताह का बेस्ट शो

इस हफ्ते का सबसे बेहतरीन शॉर्ट ड्रामा। एक्शन, सस्पेंस और रहस्य सब कुछ है। कंटेनर यार्ड लोकेशन बहुत सूट कर रहा था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत जरूर देखना चाहिए। अगले एपिसोड का इंतजार नहीं हो रहा है। सबूत मिलने के बाद क्या होगा, यह जानना है। मुझे बहुत मजा आया।