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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां33एपिसोड

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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
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इस एपिसोड की समीक्षा

दुकान में तनावपूर्ण माहौल

इस दृश्य में भूरे जैकेट वाले की आंखों में एक अजीब सी बेचैनी साफ दिख रही थी। दुकानदार का बचाव करना और फिर भी डरना सब कुछ बता रहा है। जब उसने पानी का गिलास थमाया, तो लगा जैसे कोई पुरानी कहानी फिर से शुरू हो गई हो। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे ही पल दिल को छू लेते हैं। सफेद स्वेटर वाली की चिंता साफ झलक रही थी।

नीले जैकेट वाली का रवैया

नीले जैकेट वाली लड़की का खड़ा होना और चुपचाप सब देखना बहुत गहरा संदेश दे रहा था। लगता है वह सब जानती है पर बोल नहीं रही। भूरे जैकेट वाले के चेहरे के भाव बदलते रहे। दुकान की भीड़भाड़ में यह खामोशी शोर मचा रही थी। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी में यह चुप्पी सबसे बड़ा सवाल है। हर कोई कुछ छिपा रहा है।

पानी का गिलास और खामोशी

जब सफेद स्वेटर वाली ने पानी का गिलास बढ़ाया, तो भूरे जैकेट वाले ने उसे ऐसे देखा जैसे कोई याद ताजा हो गई हो। यह छोटा सा कदम बहुत बड़ा मतलब रखता है। दुकानदार का घबराहट में हाथ हिलाना भी गौर करने लायक था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे छोटे संकेतों से बड़ी कहानी बनती है। मुझे यह ड्रामा बहुत पसंद आ रहा है।

दुकानदार की घबराहट

चश्मे वाले दुकानदार के चेहरे पर पसीना साफ दिख रहा था। वह कुछ समझाने की कोशिश कर रहा था पर शब्द नहीं मिल रहे थे। भूरे जैकेट वाला बस सुन रहा था, जैसे कोई फैसला लेने वाला हो। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत का यह सीन बहुत ही तनावपूर्ण था। पीछे खड़ी लड़कियों की चुप्पी भी कुछ कह रही थी। माहौल बहुत भारी लग रहा था।

भूरे जैकेट वाले की चुप्पी

वह कुछ बोला नहीं, बस अपनी आंखों से सब कुछ कह गया। भूरे जैकेट वाले का खड़ा होना और उसका देखने का तरीका बहुत गहरा था। दुकान के अंदर का माहौल एकदम शांत हो गया था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे किरदार ही जान डालते हैं। सफेद स्वेटर वाली की मदद करने की कोशिश भी प्यारी लगी। सब कुछ बहुत असली लग रहा है।

पुरानी यादों का साया

लगता है यह दुकान किसी पुरानी यादगार जगह से कम नहीं है। भूरे जैकेट वाले के चेहरे पर अतीत का बोझ साफ दिख रहा था। दुकानदार शायद उसका पुराना परिचित है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की पटकथा में यह मोड़ बहुत अहम है। नीले जैकेट वाली का शांत रहना भी संदेह पैदा करता है। कहानी में क्या होने वाला है।

सफेद स्वेटर वाली की समझदारी

उसने बिना कुछ कहे पानी का गिलास देकर स्थिति को संभालने की कोशिश की। भूरे जैकेट वाले ने गिलास तो लिया पर पीया नहीं। यह दिखाता है कि वह कितना परेशान है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे भावनात्मक पल बहुत आते हैं। दुकान के शेल्फ और सामान भी पृष्ठभूमि में अच्छे लग रहे थे। मंच सजावट बहुत अच्छी है।

तनाव की चरम सीमा

जब दुकानदार ने हाथ हिलाए, तो लगा बात बिगड़ रही है। भूरे जैकेट वाले का गुस्सा शांत था पर खतरनाक लग रहा था। दोनों लड़कियां पीछे खड़ी सब देख रही थीं। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की यह कड़ी बहुत ही रोमांचक थी। कैमरे की पकड़ भी बहुत सही थी। चेहरे के भाव साफ दिखाई दे रहे थे। मुझे यह सीन बहुत पसंद आया।

अनकही बातें

सब कुछ बोला गया पर कुछ भी साफ नहीं हुआ। यही इस ड्रामे की खूबसूरती है। भूरे जैकेट वाले की आंखों में सवाल थे। दुकानदार के पास जवाब नहीं थे। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे पहेली जैसे सीन बहुत हैं। सफेद स्वेटर वाली की चिंताजनक नजरें भी गौर करने लायक थीं। कहानी आगे क्या मोड़ लेगी।

अंत का दृश्य बहुत गहरा था

जब वह अकेला खड़ा रहा और पानी का गिलास हाथ में था, तो लगा वह अंदर से टूट गया हो। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की चरम सीमा ऐसी ही होगी। नीले जैकेट वाली का चले जाना भी एक संकेत था। दुकान की रोशनी और छाया का खेल बहुत अच्छा था। यह शो देखने में बहुत मजा आ रहा है। सबको देखना चाहिए।