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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां41एपिसोड

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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
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इस एपिसोड की समीक्षा

झूठे वादों का सच

इस दृश्य में सूट वाले व्यक्ति का घमंड देखकर हैरानी हुई। जब निरीक्षक ने रिपोर्ट दिखाई तो उसका चेहरा उतर गया। सब्जियों के दाम और ऑर्गेनिक होने का दावा सब झूठ था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत जैसे ड्रामा में ऐसे मोड़ देखना रोमांचक है। ग्राहकों का गुस्सा जायज था। दुकान का माहौल तनावपूर्ण हो गया था। सबकी नजरें उस कागज पर थीं।

सब्जी खरीदने का डर

सफेद ब्लाउज वाली महिला ने जब सब्जी उठाई तो लगा कुछ गड़बड़ है। दाम बहुत ज्यादा थे। सूट वाले आदमी की बातों में चिकनाई थी। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी में यह सब बहुत रियल लगा। निरीक्षक के आते ही सब बदल गया। झूठ ज्यादा दिन नहीं छिपता। यह सबक सबके लिए है।

निरीक्षक की एंट्री

काले वर्दी वाले व्यक्ति ने जब फाइल खोली तो सन्नाटा छा गया। सूट वाले की हंसी गायब हो गई। यह पल सबसे बेहतरीन था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे सीन दिल को छू लेते हैं। सच्चाई सामने आने से कोई नहीं बच सकता। दुकानदार की घबराहट साफ दिख रही थी।

महंगी सब्जियों का खेल

रैक पर लगे दाम देखकर आंखें फटी रह गईं। साधारण सब्जी को ऑर्गेनिक बताकर बेचना धोखा है। भूरे वेस्ट वाले व्यक्ति ने चुपचाप सब देखा। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत जैसे शो में ऐसे मुद्दे उठाना जरूरी है। अंत में सब ग्राहक नाराज होकर चले गए। यह परिणाम बुरा था।

घमंड का अंत

शुरुआत में सूट वाला व्यक्ति बहुत खुश था। उसे लगा सब उसकी मुट्ठी में है। लेकिन कागज के टुकड़े ने सब बदल दिया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की पटकथा बहुत मजबूत है। उसकी घबराहट देखकर लगा कि अब पछतावा होगा। झूठ बोलने का यही नतीजा होता है।

दुकान का तनाव

कैश काउंटर पर भीड़ जमा थी। सब कुछ सामान्य लग रहा था जब तक निरीक्षक आया। माहौल एकदम बदल गया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में यह मोड़ बहुत अच्छा लगा। कैशियर भी हैरान खड़ी थी। सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि कोई कुछ समझ पाता उससे पहले ही सब खुल गया।

कागज की ताकत

एक रिपोर्ट ने पूरा खेल बदल दिया। सूट वाले के पास बचने का कोई रास्ता नहीं था। उसकी आंखों में डर साफ दिख रहा था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे सीन दर्शकों को बांधे रखते हैं। सच्चाई हमेशा जीतती है। यह संदेश बहुत मजबूत है। सबको यह देखना चाहिए।

ग्राहकों की नाराजगी

जब सबको सच पता चला तो सबका गुस्सा सातवें आसमान पर था। वे सामान वापस रखकर चले गए। सूट वाले को अकेला छोड़ दिया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में यह दृश्य बहुत प्रभावशाली था। विश्वास टूटने के बाद वापस नहीं जुड़ता। यह सबक याद रखने जैसा है।

चुपचाप देखने वाला

भूरे रंग के वेस्ट वाले व्यक्ति ने कुछ नहीं कहा बस देखता रहा। उसे सब पता था शायद। उसकी चुप्पी सबसे शोरगुल थी। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे किरदार कहानी को आगे बढ़ाते हैं। जब सच सामने आया तो उसने राहत की सांस ली। यह किरदार रहस्यमयी था।

अंत की घबराहट

वीडियो के अंत में सूट वाले की हालत खराब हो गई। उसे समझ आ गया कि अब सब खत्म है। निरीक्षक ने अपना काम ठीक से किया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत का यह एपिसोड बहुत शिक्षाप्रद है। धोखाधड़ी करने वालों को ऐसा ही होना चाहिए। न्याय मिला सबको।