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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां28एपिसोड

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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
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इस एपिसोड की समीक्षा

गले मिलने का पल

भूरे जैकेट वाले लड़के की चिंता साफ दिख रही थी। जब उसने उस लड़की को गले लगाया, तो लगा जैसे उसे राहत मिली हो। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे पल दिल को छू लेते हैं। किरदारों के बीच का लगाव बहुत गहरा लग रहा है। हर भाव में दर्द था।

दुकान का रहस्य

उस छोटी दुकान में वो काले कपड़े वाला आदमी शक पैदा कर रहा था। लड़की ने जब इशारा किया, तो रहस्य बढ़ गया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी में ये मोड़ बहुत जरूरी था। डर और हिम्मत का मिश्रण देखने लायक था। माहौल में तनाव साफ झलक रहा था।

फोन की घंटी

फोन कॉल वाले दृश्य से ही कहानी की गंभीरता समझ आ गई। दोनों तरफ घबराहट साफ थी। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे छोटे विवरण बड़े असर डालते हैं। अभिनय इतना स्वाभाविक है कि आप खुद को उस स्थिति में पाते हैं। संवाद बहुत ही दमदार लग रहे थे।

सूट वाला आदमी

सूट वाले आदमी की एंट्री ने माहौल बदल दिया। लगता है वो किसी बड़ी ताकत का हिस्सा हैं। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में शक्ति गतिशीलता बहुत दिलचस्प है। हर किरदार की अपनी एक अलग पहचान बन रही है। उनकी चाल में अलग ही रौब था।

सच्ची दोस्ती

लेदर जैकेट वाली दोस्त का साथ बहुत प्यारा लगा। मुसीबत में सच्चे साथी ही काम आते हैं। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में दोस्ती की ये मिसाल काबिले तारीफ है। महिला किरदारों को बहुत मजबूती से दिखाया गया है। उनकी आंखों में चिंता साफ थी।

सुरक्षा की छांव

भूरे जैकेट वाले ने जब उसे अपनी बाहों में लिया, तो लगा जैसे दुनिया से लड़ जाएगा। सुरक्षा वाला ये अंदाज बहुत पसंद आया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में प्रेम और कार्रवाई का संतुलन सही है। दिल की धड़कनें तेज हो गईं। ये पल बहुत खास था।

असली माहौल

दुकान के अंदर का माहौल बहुत असली लगा। साधारण जगह पर इतना बड़ा नाटक होना हैरान करने वाला है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में स्थान का चुनाब बहुत सटीक है। आम जिंदगी में छिपे राज़ बहुत गहरे होते हैं। परिवेश बहुत अच्छा था।

आंखों का डर

लड़की की आंखों में डर साफ झलक रहा था। जब वो कांप रही थी, तो दर्द महसूस हुआ। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में भावनात्मक परतें बहुत अच्छी हैं। अभिनेत्री ने अपनी भूमिका को बहुत खूबसूरती से निभाया है। चेहरे के भाव बहुत गहरे थे।

अगला कदम

कहानी में अगला मोड़ क्या होगा, ये सोचकर ही उत्सुकता बढ़ रही है। क्या वो काले कपड़े वाला वापस आएगा? आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में रहस्य बना हुआ है। हर कड़ी के बाद नया सवाल खड़ा हो जाता है। कथा बहुत मजबूत लग रही है।

बेहतरीन दृश्य

कुल मिलाकर ये दृश्य बहुत तनावपूर्ण था। अभिनय से लेकर निर्देशन तक सब कुछ जच रहा है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत देखने का अनुभव बहुत यादगार रहा। ऐसे शो ही असली मनोरंजन की परिभाषा हैं। प्रस्तुति की गुणवत्ता भी बहुत अच्छी थी।