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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां46एपिसोड

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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
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इस एपिसोड की समीक्षा

काले कोट वाला खतरनाक

काले कोट वाले व्यक्ति का रवैया बहुत ही शानदार था। उसने बिना किसी डर के सबके सामने अपनी ताकत दिखाई। जब उसने चाकू निकाला तो सबकी सांसें रुक गईं। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत नामक इस शो में ऐसा लगता है कि असली खेल अब शुरू हुआ है। लाल कालीन पर खून के निशान देखकर रोंगटे खड़े हो गए। बॉस की कुर्सी भी अब सुरक्षित नहीं लग रही है। क्या यह गद्दारी है या बदला? हर पल नया मोड़ ले रहा है। दर्शक भी हैरान हैं। यह दृश्य अविस्मरणीय है।

सौदे की गहराई

भूरे सूट वाले नेता की आंखों में चालाकी साफ दिख रही थी। कागजात के बदले में जो सौदा हुआ, वह किसी आम बातचीत जैसा नहीं था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी में धोखे की परतें बहुत गहरी हैं। लाल शर्ट वाले व्यक्ति की चीखें अभी भी कानों में गूंज रही हैं। काले कोट वाले ने बिना पलक झपकाए वार किया। यह सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि एक युद्ध का मैदान था। अगला एपिसोड देखने के लिए मैं बेताब हूं। सब कुछ अनिश्चित है।

शांत शुरुआत तूफानी अंत

इस दृश्य की शुरुआत ही इतनी शांत थी कि तूफान का अंदाजा नहीं हुआ। जब काले कोट वाले ने दस्तखत के लिए कागज बढ़ाए, तो माहौल बदल गया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में हर किरदार अपने मकसद में लगा है। खूनी हाथ और वो चाकू किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लग रहे थे। लकड़ी की बनावट और पुराना हॉल इस कहानी को और भी गहराई दे रहा है। क्या वह कागज सच में अहम था? सब कुछ संदेह के घेरे में है। देखने वाला दंग रह गया।

इंसानियत ताक पर

लाल फूलों वाली शर्ट पहने व्यक्ति की हालत देखकर तरस आया। उसे जबरदस्ती झुकाया गया और फिर पैर से ठोकर मारी गई। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में सत्ता के लिए इंसानियत को ताक पर रख दिया गया है। काले कोट वाले की आवाज में ठंडक थी जो खतरनाक साबित हुई। चारों तरफ बैठे लोग बस तमाशबीन बने रहे। यह खामोशी शोर से ज्यादा डरावनी थी। क्या कोई उसकी मदद करेगा? सब डरे हुए लग रहे थे। न्याय कहां है?

कागजों का खेल

कागजातों की अदला-बदली देखकर लगा कि कोई बड़ा समझौता हो रहा है। लेकिन उसमें छिपी शर्तें क्या थीं, यह कोई नहीं जानता। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की पटकथा बहुत मजबूत है। काले कोट वाले ने दस्तावेज पकड़ते ही अपनी शर्त रख दी। भूरे सूट वाले के चेहरे के भाव पढ़ना मुश्किल हो गया था। क्या यह जीत है या हार? हर फ्रेम में एक नया सवाल खड़ा हो जाता है। दर्शक बस देखते रह जाते हैं। रहस्य बना हुआ है।

सेटिंग और माहौल

पुराने जमाने का हॉल और बीच में लाल कालीन, यह सेटिंग बहुत जच रही है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में पुराने और नए जमाने का टकराव दिखता है। काले कोट वाले का स्टैंड बहुत दमदार था। उसने सबको चुनौती दी बिना कुछ बोले। खून से सने हाथ और वो चाकू कहानी का अहम हिस्सा बन गए हैं। क्या यह बदले की आग है? हर कोई इसका जवाब ढूंढ रहा है। मुझे यह ड्रामा बहुत पसंद आ रहा है। कलाकार बेहतरीन हैं।

चाकू और गुस्सा

जब उसने चाकू को घुमाया तो लगा कि अब कोई नहीं बचेगा। काले कोट वाले की आंखों में गुस्सा साफ झलक रहा था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में एक्शन और ड्रामा का सही मिश्रण है। लाल शर्ट वाले की चीख से पूरा हॉल गूंज उठा। भूरे सूट वाले ने बस चुपचाप सब देखा। क्या वह भी इस साजिश का हिस्सा है? हर किरदार के अपने राज हैं। यह अनिश्चितता ही इस शो की जान है। रोमांच बना रहेगा।

खूनी मुट्ठी का दर्द

खूनी मुट्ठी को देखकर ही अंदाजा हो गया कि क्या हुआ होगा। काले कोट वाले ने बिना किसी रहम के वार किया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में जज्बातों को बहुत गहराई से दिखाया गया है। दर्द सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक भी है। चारों तरफ बैठे लोग भी अब असहज हो गए हैं। क्या यह अंत है या शुरुआत? हर पल नया सस्पेंस पैदा कर रहा है। मुझे अगला पार्ट देखने की जल्दी है। कहानी दिलचस्प है।

खामोशी का शोर

इस सीन में डायलॉग से ज्यादा एक्शन और इशारों में बात हुई है। काले कोट वाले ने कागज थमाकर सबको चुप करा दिया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी में खामोशी भी हथियार है। भूरे सूट वाले की कुर्सी अब हिलने लगी है। लाल कालीन पर गिरा व्यक्ति अब उठ नहीं पा रहा था। यह सत्ता का खेल कब तक चलेगा? हर कोई अपने फायदे के लिए लड़ रहा है। यह दृश्य दिल दहला देने वाला था। असली खेल शुरू हुआ।

अंत या शुरुआत

आखिरकार वो पल आ ही गया जब सब कुछ खुलकर सामने आया। काले कोट वाले ने अपनी ताकत का लोहा मनवा दिया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में हर एपिसोड नया ट्विस्ट लाता है। कागजात, चाकू और खून, यह सब मिलकर एक तस्वीर बना रहे हैं। क्या वह नेता अब भी सुरक्षित है? शायद नहीं। इस शो ने मेरी उम्मीदों से ज्यादा मनोरंजन किया है। बस यही कहना है कि कमाल का ड्रामा है। सब देखें इसे। जरूर देखें।