जब कैशियर ने वह गुलाबी थर्मस दिया, तो सब कुछ बदल गया। आँखों में छिपी कहानी साफ दिख रही थी। दुकान की सादगी में भी प्यार खिल सकता है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत जैसा एहसास आ रहा है। बहुत प्यारा दृश्य था। चश्मे वाले लड़के की मुस्कान देखकर दिल खुश हो गया। सच में छोटी खुशियाँ ही बड़ी होती हैं। यह पल हमेशा याद रहेगा। ऐसे सीन देखकर लगता है कि प्यार कहीं भी हो सकता है।
रात के खाने का दृश्य बहुत दिल को छू लेने वाला था। सब एक साथ बैठे हुए, जैसे परिवार हों। दुकान के अंदर ही खाना बनाना और खाना कितना अजीब और प्यारा है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में भी ऐसे ही माहौल हैं। यारी और प्यार का सही मिश्रण। खाना देखकर भूख लग गई। गर्मा गर्म खाने का मजा ही अलग होता है। सबके चेहरे पर खुशी थी।
काले कोट वाले लड़के की चुप्पी सब कुछ कह रही थी। शायद वह कुछ कहना चाहता था पर रुका रहा। रहस्य बना हुआ है कि आगे क्या होगा। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की तरह यह भी एक जटिल रिश्ता लगता है। काश हमें अंदर की बात पता चल पाती। उसकी आँखों में कुछ था। शायद वह भी कुछ महसूस कर रहा था। कहानी में गहराई है।
सफेद ब्लाउज वाली लड़की का व्यवहार बहुत शांत था। वह सबको देख रही थी, जैसे कुछ समझ रही हो। महिला किरदारों की गहराई इस कार्यक्रम में कमाल की है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत देखने के बाद यह सीन और भी खास लगा। अभिनय बहुत स्वाभाविक है। सबने अच्छा किया। हर भावभंगिमा सटीक था। कलाकारों ने मेहनत की है।
किराना दुकान का परिवेश बहुत अनोखा है। रोजमर्रा की जिंदगी के बीच प्रेम कहानी ढूंढना आसान नहीं है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत ने भी ऐसे ही परिवेश का इस्तेमाल किया था। कैशियर की मेहनत और प्यार दोनों संभालना आसान नहीं है। सलाम है उसकी ताकत को। महिला सशक्तिकरण भी दिख रहा है। प्रेरणादायक है।
खाने के दृश्य में जो हंसी थी, वह असली लग रही थी। तली हुई सब्जी और शोरबा देखकर भूख लग गई। दोस्तों के साथ खाना खाने का सुकून अलग ही है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में भी खाने वाले सीन यादगार हैं। यह कड़ी दिल को बहुत अच्छा लगा। सब खुश थे। माहौल बहुत सकारात्मक था। दोस्ती झलक रही थी।
चश्मे वाले लड़के का प्रतिक्रिया देखने लायक था। पहले हैरान, फिर खुश। प्यार में ऐसे ही पल आते हैं जब कोई छोटा उपहार बड़ा लगता है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की तरह यह भी एक मीठा पल था। उम्मीद है यह रिश्ता आगे बढ़ेगा। बहुत सुंदर लगा। दिल में उतर गया। प्रेमपूर्ण अंदाज था।
रात का वक्त और दुकान की रोशनी, माहौल बहुत चलचित्र जैसा था। पेड़ की शाखाएं और खिड़की का दृश्य बहुत सुंदर था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में भी ऐसे दृश्य हैं। निर्देशन और प्रकाश व्यवस्था पर बहुत ध्यान दिया गया है। कलाकारों ने जान डाल दी है। तकनीकी पक्ष भी मजबूत है। देखने में अच्छा लगा।
सबके बीच का लगाव बहुत स्वाभाविक है। कोई जबरदस्ती नहीं लग रहा है। दोस्ती और प्यार की लकीरें धुंधली हैं। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत देखने वालों को यह श्रृंखला पसंद आएगी। हर किरदार की अपनी कहानी है जो धीरे धीरे खुल रही है। मजा आ गया। कहानी में दम है। आगे का इंतजार है।
अंत में सबका एक साथ हंसना बहुत सुकून देने वाला था। दिन भर की थकान के बाद ऐसा पल मिलना दुर्लभ है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की तरह यह कार्यक्रम भी जीवन के सच को दिखाता है। एप्लिकेशन पर ऐसी सामग्री देखना बहुत अच्छा लगता है। बिल्कुल पसंद आया। समय बर्बाद नहीं हुआ।