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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां25एपिसोड

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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
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इस एपिसोड की समीक्षा

चाय की चुस्की में छिपा राज

चाय की चुस्की के बीच छिपा है असली खेल। बुजुर्ग की शांति और युवक की बेचैनी साफ दिख रही है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे सीन दिल को छू लेते हैं। पुरानी इमारत का माहौल कहानी को गहरा बना रहा है। हर नज़ारा किसी पेंटिंग जैसा लग रहा है। संवाद बिना बोले ही सब कह जाते हैं। यह दृश्य बहुत ही रहस्यमयी है। दर्शक को बांधे रखता है। कलाकारी देखने लायक है।

सूट वाले की एंट्री

सूट वाले व्यक्ति का फुसफुसाना सब कुछ बदल देता है। बुजुर्ग के चेहरे पर मुस्कान फिर भी बनी रहती है। यह शक्ति का प्रतीक है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी में ऐसे मोड़ आते हैं जो सोचने पर मजबूर कर दें। भूरे जैकेट वाले युवक की प्रतिक्रिया देखने लायक है। वह जान गया है कि खेल बदल गया है। अब वह क्या करेगा यह देखना है। तनाव बढ़ता जा रहा है।

पारंपरिक सजावट

पारंपरिक चाय समारोह की सुंदरता देखते ही बनती है। हरे रंग के कप और लकड़ी की मेज क्लासिक लग रही है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में संस्कृति और आधुनिकता का मिलन है। बैंगनी जैकेट वाले बुजुर्ग का अंदाज बहुत भारी है। वह बिना आवाज उठाए भी हुकूमत चला रहे हैं। यह शैली मुझे बहुत पसंद आई। कलाकारी बेमिसाल है। सेट डिजाइन शानदार है।

खामोश संवाद

युवक की आंखों में सवाल हैं पर वह चुप है। वह जानता है कि ज्यादा बोलना खतरनाक हो सकता है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में हर किरदार की अपनी मजबूरी है। पीछे लगा स्क्रीन पेंटिंग जैसे दृश्य को और भी खूबसूरत बना रहा है। रोशनी का खेल कमाल का है। यह दृश्य सिनेमाई लग रहा है। निर्देशन बहुत सटीक है। भावनाएं साफ दिख रही हैं।

ताकत का प्रदर्शन

जब सहायक ने आकर कुछ कहा तो माहौल बदल गया। बुजुर्ग ने चाय पीना जारी रखा। यह उनकी ताकत को दिखाता है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे पावर डायनामिक्स बहुत दिलचस्प हैं। युवक को अब उठना पड़ा। उसे समझ आ गया कि अब उसकी बारी नहीं है। यह अंत बहुत प्रभावशाली था। कहानी आगे बढ़ती है। रोमांच बना हुआ है।

खामोशी का शोर

गुझेंग वाद्ययंत्र आगे रखा है पर कोई नहीं बजा रहा। यह खामोशी शोर मचा रही है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में संगीत का अभाव भी एक संदेश है। बैंगनी जैकेट वाले बुजुर्ग की हंसी में छिरा है कुछ राज। युवक को यह पसंद नहीं आया। वह चुपचाप सब सह रहा है। यह तनाव बहुत अच्छे से बनाया गया है। माहौल गहरा है। संगीत की कमी खलती है।

कप पकड़ने का ढंग

चाय पीने का तरीका भी यहां एक भाषा है। कप को पकड़ने का ढंग सब कुछ बता देता है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में छोटी चीजों का बड़ा महत्व है। भूरे जैकेट वाले युवक ने कप वापस रखा तो सम्मान दिखा। लेकिन उसकी आंखें कुछ और कह रही थीं। यह द्वंद्व बहुत गहरा है। मुझे यह पसंद आया। अभिनय शानदार है। बारीकियां गजब की हैं।

पेंटिंग और तनाव

पीछे की पेंटिंग में पहाड़ और झील हैं। यह शांति का प्रतीक है पर कमरे में तनाव है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में विरोधाभास बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। सूट वाले व्यक्ति की एंट्री ने सबकी नींद उड़ा दी। वह सिर्फ खड़ा नहीं था। वह एक संदेश लेकर आया था। यह मोड़ बहुत तेज था। दर्शक हैरान रह गए। पृष्ठभूमि सुंदर है।

माला और पहचान

बुजुर्ग की माला और पेंडेंट उनकी पहचान है। वह धार्मिक लगते हैं पर खेल कठिन है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में किरदारों की परतें बहुत गहरी हैं। युवक को लगा कि वह जीत गया पर ऐसा नहीं था। अंत में वह चला गया। यह हार नहीं थी बल्कि रणनीति थी। कहानी आगे क्या होगी जानना है। इंतजार रहेगा। किरदार गहरे हैं।

रोशनी का खेल

रोशनी की किरणें खिड़की से आ रही हैं। धूल के कण भी नाच रहे हैं। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में सिनेमेटोग्राफी बहुत मजबूत है। बैंगनी जैकेट वाले बुजुर्ग का हर हावभाव मायने रखता है। युवक के जाने के बाद भी कहानी वहीं रुकी नहीं है। यह अंत एक नई शुरुआत है। मुझे यह दृश्य बहुत भाया। कला बहुत प्यारी है। फ्रेमिंग सही है।