PreviousLater
Close

आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां48एपिसोड

2.0K2.0K

आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

चाय और तनाव का खेल

चाय की चुस्की के बीच जो तनाव था, वो कमाल का था। बुजुर्ग व्यक्ति की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। युवक ने बिना कुछ कहे ही सब साफ कर दिया। लड़ाई के दृश्य बहुत तेज थे। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत देखकर लगा कि असली ताकत चुप्पी में होती है। माहौल बहुत गहरा था और हर पल कुछ नया होता रहा। मुझे यह दृश्य बहुत भाया।

शानदार लड़ाई का दृश्य

लड़ाई का दृश्य बहुत शानदार था। युवक ने दोनों गुंडों को एक पल में नीचे गिरा दिया। बुजुर्ग व्यक्ति का कप तोड़ना उसकी हार को दर्शाता है। कहानी में जो मोड़ आया, वो अचानक था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे ही ड्रामे की उम्मीद थी। अभिनय बहुत असली लगा। सब कुछ बहुत अच्छे से बनाया गया है।

पुराने घर की सजावट

पुराने घर की सजावट और चाय का सेटअप बहुत सुंदर था। लेकिन बातचीत में जो कड़वाहट थी, वो दिल को छू गई। युवक का रवैया बहुत साफ था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत ने दिखाया कि रिश्ते कैसे टूटते हैं। अंत में कप का टूटना प्रतीकात्मक था। बहुत गहराई थी इसमें और देखने में मजा आया।

किरदारों का संघर्ष

बैंगनी जैकेट वाले व्यक्ति का गुस्सा देखने लायक था। काले कोट वाले युवक ने अपनी ताकत दिखा दी। दोनों के बीच की दुश्मनी साफ झलक रही थी। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में किरदारों का संबंध बहुत अच्छा है। मुझे यह संघर्ष बहुत पसंद आया और बार बार देखने को मन करता है।

खामोशी का असर

संवाद कम थे लेकिन चेहरे के भाव सब कह रहे थे। बुजुर्ग व्यक्ति की निराशा साफ दिखी। युवक ने बिना डरे सबका सामना किया। लड़ाई के बाद जो खामोशी थी, वो भारी थी। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत देखकर मन हिल गया। ऐसे ही दृश्य बार बार देखने को मिलें। यह बहुत प्रभावशाली था।

अचानक बदलाव

शुरू में लगा बस बातचीत होगी, फिर अचानक मारपीट शुरू हो गई। युवक की ताकत का अंदाजा नहीं था। बुजुर्ग व्यक्ति हैरान रह गए। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी में यह बदलाव बहुत अच्छा लगा। रफ्तार बहुत तेज थी पूरे दृश्य में और कोई बोरियत नहीं थी।

रोशनी और छाया

रोशनी और छाया का खेल बहुत अच्छा था। चेहरों पर जो भाव थे, वो कैमरे ने कैद कर लिए। चाय की मेज पर जो नाटक हुआ, वो यादगार था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की तस्वीरें बहुत प्रभावशाली हैं। हर पल में कहानी थी और देखने वाला जुड़ा रहता है। बहुत खूबसूरत बनाया है।

भावनात्मक दृश्य

गुस्से में कप तोड़ना बहुत भावनात्मक दृश्य था। युवक ने अपनी जगह बना ली। बुजुर्ग व्यक्ति की बेबसी दिखी। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत ने दिल पर असर किया। यह सिर्फ लड़ाई नहीं, जज्बात भी थे। बहुत पसंद आया मुझे और मैं इसे सबको बताऊंगा। यह बहुत खास है।

संतुलित रफ्तार

कहानी की रफ्तार बहुत संतुलित थी। धीमी शुरुआत और तेज अंत। युवक का आगमन धमाकेदार था। गुंडों को सबक सिखाना अच्छा लगा। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसा ही बहाव चाहिए। बिल्कुल बोर नहीं हुआ मैं और अंत तक जुड़ा रहा। यह बहुत रोमांचक था।

शानदार अनुभव

पूरी कहानी एक झटके में खत्म हो गई। असर बहुत गहरा छोड़ा। किरदारों की लड़ाई असली लग रही थी। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत देखकर लगा कि यह श्रृंखला सफल होगी। सब कुछ बहुत सही था। मैं इंतजार करूंगा अगले भाग का। यह बहुत शानदार अनुभव था।