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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां47एपिसोड

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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
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इस एपिसोड की समीक्षा

रहस्यमयी तस्वीरें और गहरा साजिश

शुरू का दृश्य बहुत ही तनावपूर्ण है जब काले कोट वाला व्यक्ति और सूट वाला व्यक्ति उन तस्वीरों को देख रहे हैं। लगता है कोई बड़ी जांच चल रही है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे मोड़ देखकर रोमांच होता है। चरित्रों की आंखों में गंभीरता साफ झलक रही है और दर्शक भी हैरान हैं।

आधुनिक अपार्टमेंट में अनोखी मुलाकात

जब कहानी आधुनिक घर में बदल जाती है तो माहौल पूरी तरह बदल जाता है। महिला द्वारा खाना परोसना एक शांत पल लाता है, लेकिन काले कोट वाले की एंट्री सब बदल देती है। सूट वाले व्यक्ति के चेहरे पर हैरानी देखने लायक थी। यह ड्रामा हर पल नया मोड़ देता है और बांधे रखता है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की यही खासियत है।

काले कोट वाले की दहाड़

अंत में जब काले कोट वाला व्यक्ति सीढ़ियों से उतरता है, तो कमरे का तापमान गिर जाता है। सूट वाला व्यक्ति घबरा जाता है। यह पावर डायनामिक बहुत शानदार है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी में यह टकराव सबसे बेहतरीन लग रहा है। कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है।

चश्मे वाले व्यक्ति का दोहरा रूप

चश्मे वाले व्यक्ति ने पहले गंभीर जासूस की भूमिका निभाई और फिर घर पर परिवार वाले जैसे दिखे। यह दोहरापन दर्शकों को कन्फ्यूज करता है। क्या वह सच में वही है। अभिनय बहुत सटीक है और प्लॉट में गहराई है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में हर एक्ट में नयापन है।

महिला का शांत लेकिन गहरा किरदार

महिला बिना कुछ बोले ही अपनी मौजूदगी महसूस कराती है। जब वह खाना लेकर आती है तो लगता है सब ठीक है, लेकिन काले कोट वाले की एंट्री से सब बदल जाता है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में महिला किरदारों को अच्छे से लिखा गया है। उनकी चुप्पी भी शोर है।

पुरानी इमारत का रहस्य

शुरुआत में जो लकड़ी की इमारत दिखाई गई है, वह बहुत पुरानी और रहस्यमयी लगती है। वहां की सजावट और ड्रेगन का बोर्ड कहानी की जड़ों को दर्शाता है। यह सेट डिजाइन बहुत प्रभावशाली है और माहौल बनाता है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में पुराने जमाने का अहसास होता है।

तस्वीरों में छिपा राज

मेज पर बिखरी तस्वीरें किसी खतरनाक व्यक्ति की हैं। काले कोट वाला उन्हें ध्यान से देख रहा है। यह संकेत देता है कि शिकार शुरू होने वाला है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में रहस्य का स्तर बहुत ऊंचा है। हर फ्रेम में संदेह बना रहता है।

बातचीत बिना शब्दों के

कई बार डायलॉग नहीं होते लेकिन आंखों की भाषा सब कह देती है। सूट वाले और काले कोट वाले के बीच की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचाती है। यह निर्देशन की ताकत है जो बिना बोले कहानी कह देती है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में छायांकन भी कमाल की है।

अपार्टमेंट का सुरक्षित कोना

अपार्टमेंट का दृश्य बाहर की दुनिया से अलग शांत लगता है। सोफा और टेबल की सजावट आधुनिक है। लेकिन जब बाहर का खतरा अंदर आता है तो यह सुरक्षा टूट जाती है। यह विरोधाभास बहुत अच्छा लगा। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में घर की सुरक्षा अब खतरे में है।

कहानी का अगला पड़ाव

अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि काले कोट वाला क्या करेगा। क्या वह हमला करेगा या बातचीत करेगा। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत का अगला भाग देखने के लिए हम बेताब हैं। अंत बहुत तगड़ा है। कहानी आगे क्या मोड़ लेगी।