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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां23एपिसोड

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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
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इस एपिसोड की समीक्षा

गोदाम का रहस्य

गोदाम वाला दृश्य बहुत ही तनावपूर्ण और डरावना था। नायक ने जब उस आदमी की नब्ज देखी तो लगा कि वह बहुत सावधान है। उसे जो कार्ड मिला वह कहानी की असली कुंजी लगता है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत जैसे ही उसकी जिंदगी चल रही है। हर कदम पर खतरा मंडरा रहा है और वह अकेला ही सब संभाल रहा है। देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

बचाव का पल

चश्मे वाले आदमी को बचाना इस कहानी का सबसे अहम मोड़ था। रस्सियां खोलते वक्त जो घबराहट थी वह साफ दिखी। क्यों बांधा गया था वह? सवाल बढ़ते जा रहे हैं। रहस्य गहरा होता जा रहा है। देखने में बहुत मजा आ रहा है। हर पल नया मोड़ सामने आ रहा है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत का असर है।

घर का माहौल

घर के कमरे का दृश्य अचानक माहौल बदल देता है। दोनों महिलाओं की प्रतिक्रिया बहुत बारीक थी। भूरे रंग की जैकेट वाली ने जिस तरह सहारा दिया वह दिल को छू गया। चुप्पी में भी बातें हो रही थीं। बहुत गहराई है इसमें। रिश्तों की उलझन साफ दिखती है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत।

नायक की चुप्पी

नायक के चेहरे पर कोई भाव नहीं पर आंखें सब कह रही हैं। वह किसी बोझ तले दबा लगता है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत वाली लाइन उस पर सटीक बैठती है। संघर्ष जारी है और वह हार नहीं मान रहा। उसकी आंखों में गुस्सा साफ दिखता है। कहानी बहुत आगे बढ़ेगी।

कौन है दुश्मन

सांप वाली शर्ट वाला कौन है? वह कार्ड जिसमें कुछ लिखा था वह क्या था? जानने की उत्सुकता बढ़ रही है। रहस्य का स्तर ऊंचा है। कहानी में दम है। कौन है यह दुश्मन? सब कुछ पता चलना बाकी है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसा ही है।

रिश्तों की उलझन

चार लोगों के बीच का संबंध जटिल लग रहा है। पानी का गिलास देना एक संकेत था। रिश्तों में खटास या अपनापन? समझना मुश्किल है। नाटक अच्छा बन रहा है। हर कोई कुछ छुपा रहा है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत देखना चाहिए।

कहानी की गति

कार्रवाई के बाद भावनात्मक दृश्य। गति बहुत अच्छी है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत जैसे ही मोड़ आते रहते हैं। बोरियत नहीं होती। हर दृश्य मायने रखता है। कहानी आगे बढ़ती जाती है। दर्शक बंधे रहते हैं।

रोशनी का खेल

गोदाम की रोशनी बहुत प्रभावशाली थी। फिर घर की रोशनी में अंतर साफ दिखता है। उसकी जिंदगी के दो पहलू हैं। दृश्य कथा कहने की शैली शानदार है। अंधेरा और उजाला दोनों का मतलब है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत का माहौल है।

दर्द का अहसास

चश्मे वाले आदमी को आघात हुआ लग रहा था। उसे मिली राहत असली लगती थी। भावनात्मक गहराई अप्रत्याशित थी। अभिनय सबका जचता है। दर्द साफ झलक रहा था चेहरे पर। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में यही दिखता है।

अगली कड़ी का इंतजार

शुरुआत ही इतनी धमाकेदार है। सवाल के जवाब नहीं मिल रहे। अगली कड़ी कब आएगी? आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत देखने का मन करता है। मिस मत करना। कहानी में जान है। हर पल रोमांचक है।